
देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर आंदोलन एक बार फिर तेज होने जा रहा है। इस क्रम में आठ फरवरी को प्रस्तावित न्याय यात्रा की महापंचायत को लेकर शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के देहरादून स्थित आवास पर इंडिया गठबंधन से जुड़े दलों और विभिन्न संगठनों की अहम बैठक हुई। बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई और साफ किया गया कि जब तक मामले में कथित वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर लंबे समय से न्याय की मांग उठाई जा रही है। इसी कड़ी में आठ फरवरी को महापंचायत आयोजित करने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था। शुक्रवार की बैठक में इस आयोजन को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय और भूमिका को लेकर चर्चा हुई, ताकि न्याय यात्रा को व्यापक समर्थन मिल सके।
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प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस बैठक और प्रस्तावित महापंचायत को लेकर फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
बैठक में शामिल नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब तक की कार्रवाई से आम लोगों में असंतोष है। उनका आरोप है कि वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई न होना जनता के भरोसे को कमजोर करता है। स्थानीय स्तर पर भी लोग इस महापंचायत से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
आगे क्या होगा
बैठक में यह भी तय किया गया कि आंदोलन की आगे की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए अगली बैठक तीन फरवरी को समाजवादी पार्टी के कार्यालय में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में महापंचायत और न्याय यात्रा की रूपरेखा को और स्पष्ट किया जाएगा।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद इससे पहले भी कई बार न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन, धरने और सभाएं हो चुकी हैं। बावजूद इसके, कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल अब तक शांत नहीं हुए हैं।







