
देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। अब इस मामले में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है। इससे पहले अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए सीबीआई जांच का अनुरोध किया था। हालिया घटनाक्रम और सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो के बाद मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और जनचर्चा के केंद्र में आ गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
अंकिता भंडारी हत्याकांड वर्ष 2022 में सामने आया था और यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना था। एसआईटी जांच और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन कथित वीआईपी के नाम को लेकर सवाल अब तक बने हुए हैं। हाल ही में एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह प्रकरण फिर से सुर्खियों में आ गया।
आधिकारिक जानकारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात के दौरान उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा कीं, जिन पर सरकार ने गंभीरता से विचार किया। माता-पिता के अनुरोध और उनकी भावनाओं के अनुरूप राज्य सरकार ने अंकिता भंडारी प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार शुरू से ही निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रही है।
तीन साल बाद फिर कैसे गरमाया मामला
यह मामला तब फिर चर्चा में आया जब पूर्व विधायक की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक कथित वीआईपी का जिक्र किया। इसके बाद एक ऑडियो भी सामने आया, जिसमें कुछ नेताओं के नाम लिए जाने का दावा किया गया। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए हर पहलू की निष्पक्ष जांच जरूरी है। लोगों का मानना है कि सीबीआई जांच से लंबे समय से उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
राजनीतिक हलचल और आंदोलन
मामले के दोबारा सामने आने के बाद कांग्रेस समेत कई संगठनों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। सीबीआई जांच की मांग को लेकर 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का भी आह्वान किया गया है, जिससे प्रदेश का राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
आंकड़े / तथ्य
अंकिता भंडारी हत्याकांड में एसआईटी जांच के बाद करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से 97 गवाह बनाए गए, जिनमें से 47 गवाहों की गवाही अदालत में हुई। निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
हत्याकांड का संक्षिप्त विवरण
18 सितंबर 2022 को वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था। एक सप्ताह बाद नहर से शव बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि घटना की रात अंकिता ने अपने मित्र को रिजॉर्ट में एक वीआईपी के आने की जानकारी दी थी और उस पर अतिरिक्त सेवा देने का दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि, उस वीआईपी का नाम अब तक सार्वजनिक नहीं हो सका है।
आगे क्या होगा
अब राज्य सरकार की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार को यह तय करना है कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी जाए या नहीं। इस निर्णय पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।







