
रुद्रप्रयाग: मकर संक्रांति के अवसर पर अगस्त्यमुनि में अगस्त्य मुनि महाराज की डोली यात्रा के दौरान तनावपूर्ण स्थिति बन गई। हजारों श्रद्धालुओं के साथ डोली को अगस्त्यमुनि मैदान में प्रवेश कराना था, लेकिन गोल गेट बंद होने से रास्ता अवरुद्ध हो गया। आक्रोशित भीड़ ने करीब साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद गेट तोड़ दिया, जिसके बाद डोली ने मैदान में प्रवेश किया। इस दौरान पुलिस के साथ नोकझोंक हुई और प्रतीक जैन ने गेट तोड़ने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
केदारघाटी के अगस्त्यमुनि क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध अगस्त्य मंदिर से जुड़ी यह डोली यात्रा करीब 15 वर्षों बाद आयोजित की गई। अगस्त्यमुनि मैदान में प्रशासन द्वारा प्रस्तावित स्टेडियम निर्माण को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि यह भूमि मुनि महाराज से जुड़ी है और यहां बच्चों के लिए खेल-कूद की परंपरा रही है। इसी मुद्दे पर बीते एक महीने से मैदान में गद्दीस्थल के पास धरना-प्रदर्शन जारी है।
घटना का क्रम
14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन डोली को मैदान में प्रवेश नहीं मिला और केदारनाथ हाईवे पर कई घंटे जाम लगा रहा, जिसके बाद डोली वापस मंदिर लौटी। 15 जनवरी को सुबह करीब 11 बजे डोली दोबारा गद्दीस्थल के लिए रवाना हुई। गोल गेट टूटा न मिलने पर श्रद्धालु आक्रोशित हो गए और दोपहर सवा 12 बजे के आसपास गेट तोड़ने का प्रयास शुरू हुआ। लगातार प्रयासों के बाद शाम करीब चार बजे गेट टूट सका।
मैदान में प्रवेश और अनुष्ठान
गेट टूटने के बाद मुनि महाराज की डोली ने नेजा-निशानों के साथ अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल के लिए प्रस्थान किया। मैदान पहुंचते ही हजारों श्रद्धालु एकत्र हो गए। डोली ने स्टेडियम निर्माण स्थल के पास कुछ देर नृत्य किया और फिर गद्दीस्थल में विराजमान हुई। जयकारों से क्षेत्र गूंज उठा और पुजारियों ने विधिवत भोग अर्पित किया।
आधिकारिक जानकारी
प्रशासन की ओर से कहा गया कि वैकल्पिक मार्ग सुझाया गया था, लेकिन उसे नहीं अपनाया गया। उपजिलाधिकारी एस.एस. सैनी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग मामले को अनावश्यक रूप से तूल देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। ड्रोन कैमरों से गेट तोड़ने वालों की पहचान की जा रही है।
प्रशासन का कड़ा रुख
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने स्पष्ट किया कि धार्मिक भावनाओं की आड़ में अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकारी संपत्ति को नुकसान, अधिकारियों से अभद्रता और नेशनल हाईवे 107 को बाधित करने के मामलों में मुकदमा दर्ज होगा। कुछ ‘रिपेटिटिव ऑफेंडर्स’ पर गुंडा एक्ट लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और मंदिर समिति से जुड़े सदस्यों का कहना है कि भूमि को लेकर प्रशासन को संवाद बढ़ाना चाहिए था। वहीं, कुछ नागरिकों का मत है कि परंपराओं के साथ कानून-व्यवस्था का संतुलन जरूरी है।
आंकड़े / तथ्य
गेट तोड़ने में लगभग साढ़े तीन घंटे लगे। हाईवे पर तीन से चार घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। डोली यात्रा करीब 15 वर्षों बाद आयोजित हुई।
आगे क्या होगा
प्रशासन ड्रोन फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पहचान कर कानूनी कार्रवाई करेगा। स्टेडियम निर्माण और भूमि विवाद पर आगे संवाद की संभावना जताई जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।







