
देहरादून: यूकेएसएसएससी (UKSSSC) पेपर लीक मामले में फंसी असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन की जमानत याचिका सीबीआई कोर्ट ने खारिज कर दी है। परीक्षा से ठीक पहले सुमन और खालिद के बीच हुई बातचीत, जिसमें पेपर से जुड़े संकेत मिलते हैं, केस में महत्वपूर्ण सबूत माने जा रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यूकेएसएसएससी परीक्षा पेपर लीक मामला कई महीनों से राज्यभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच उत्तराखंड पुलिस से स्थानांतरित होकर सीबीआई को सौंपे जाने के बाद इस मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। सीबीआई अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और कड़ी पूछताछ जारी है।
अधिकारीक जानकारी
मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब सीबीआई ने अदालत में खालिद और असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन के बीच हुई चैट प्रस्तुत की। जानकारी के अनुसार परीक्षा के दिन सुबह 7:55 बजे खालिद ने सुमन को संदेश भेजा था कि “मैडम थोड़ा टाइम निकाल लो, सिस्टर का एग्जाम है… MCQ सॉल्व कर देना प्लीज।”
सुमन ने 8:02 बजे “ओके” लिखकर जवाब दिया था। सीबीआई के अनुसार इस चैट से स्पष्ट होता है कि सुमन की पेपर लीक में एक सक्रिय भूमिका रही है, जिसके आधार पर अदालत ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
सीबीआई ने 28 नवंबर को सुमन चौहान को गिरफ्तार किया था। इसी गिरफ्तारी के बाद जांच की आंच बेरोजगार संघ के नेता बॉबी पंवार तक भी पहुंची। पंवार से सीबीआई ने लगभग नौ घंटे तक पूछताछ की, जिसमें उनसे सुमन चौहान से संपर्क, पेपर मिलने की परिस्थितियों और आगे किए गए दावों पर विस्तृत जानकारी मांगी गई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पेपर लीक मामले में लगातार हो रहे खुलासों से युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों में रोष है। कई छात्रों का कहना है कि भविष्य से खिलवाड़ करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस तरह के घोटालों से प्रदेश की भर्ती प्रणाली पर विश्वास लगातार कमजोर होता जा रहा है।
आगे की स्थिति
सीबीआई अब इस चैट के आधार पर केस की अन्य कड़ियों को जोड़ने में लगी है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पेपर किन-किन लोगों तक पहुंचा और इसमें कौन-कौन शामिल हो सकता है। बॉबी पंवार से पूछताछ के बाद सीबीआई आगे की कार्रवाई तय करेगी। मामले में अब और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।







