
रामनगर: नैनीताल जिले की सबसे संवेदनशील मानी जाने वाली रामनगर कोतवाली एक बार फिर सुर्खियों में है। कोतवाल सुशील कुमार का अचानक हुआ ट्रांसफर और फिर उसका रद्द हो जाना पूरे पुलिस महकमे से लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। महज दो माह से कम समय में हुई इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रामनगर कोतवाली को लंबे समय से जिले की सबसे रणनीतिक और प्रभावशाली पोस्टिंग के रूप में जाना जाता है। यहां नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक दबाव अक्सर देखा जाता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में सुशील कुमार की पोस्टिंग शुरू से ही चर्चा में रही थी।
उन्होंने 11 अक्टूबर को बनभूलपुरा से स्थानांतरित होकर रामनगर कोतवाली में कार्यभार संभाला था। इससे पहले 23 सितंबर को तत्कालीन कोतवाल अरुण सैनी का तबादला कालाढूंगी कर दिया गया था, जिसके बाद लगभग दस दिनों तक यह पद खाली रहा। सुशील कुमार की तैनाती के बाद कोतवाली में प्रशासनिक गतिविधियाँ एक बार फिर तेज हुईं।
आधिकारिक जानकारी
बुधवार रात अचानक सुशील कुमार का ट्रांसफर वापस बनभूलपुरा कर दिया गया। इसके बाद गुरुवार को उन्होंने सरकारी आवास से सामान समेटना भी शुरू कर दिया था। इसी बीच नए कोतवाल के रूप में दिनेश फर्त्याल के स्वागत की तैयारियाँ सोशल मीडिया पर फैलने लगीं।
लेकिन शुक्रवार सुबह घटनाक्रम पूरी तरह पलट गया। उनके ट्रांसफर आदेश को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। सुशील कुमार ने स्वयं इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पूछड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित अतिक्रमण ध्वस्तीकरण की महत्वपूर्ण कार्रवाई के कारण फिलहाल उनका ट्रांसफर स्थगित किया गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामनगर कोतवाली में हर नियुक्ति के साथ प्रशासनिक खींचतान और राजनीतिक प्रभाव की चर्चाएँ चलती रहती हैं। कई लोगों ने यह भी बताया कि कोतवाल स्तर पर बार-बार बदलाव से कानून व्यवस्था प्रभावित होती है और कई संवेदनशील कार्रवाइयों पर इसका असर पड़ सकता है।
पृष्ठभूमि के पुराने उदाहरण
रामनगर कोतवाली का इतिहास भी इसी तरह के घटनाक्रमों से भरा रहा है। कोतवाल कैलाश पंवार के कार्यकाल में चौकियों पर सिपाहियों की तैनाती तक के लिए लॉटरी सिस्टम अपनाना पड़ा था। वहीं अरुण सैनी तीन साल नौ माह तक इस कोतवाली में सबसे लंबे समय तक तैनात रहने वाले प्रभारी निरीक्षक रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि यह थाना हमेशा से प्रशासनिक रस्साकशी का केंद्र रहा है।
आगे क्या?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में पूछड़ी क्षेत्र में अवैध कब्जों पर होने वाली कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए फिलहाल कोतवाल नहीं बदला जाएगा। आगे की नियुक्तियों और तबादलों पर निर्णय इसी कार्रवाई के बाद लिए जाने की संभावना है।
इन घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रामनगर कोतवाली न सिर्फ संवेदनशील है, बल्कि इस पर होने वाले छोटे से छोटा बदलाव भी जिलेभर में चर्चा और प्रभाव पैदा कर देता है।







