
ऋषिकेश और आसपास क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे रेंटल बाइक-स्कूटी कारोबार के बीच रेंटल संचालक इन दिनों ऑनलाइन चालानों की वजह से भारी परेशानी झेल रहे हैं। पर्यटकों द्वारा ट्रैफिक नियमों का पालन न करने के कारण एनपीआर कैमरों से होने वाले चालान सीधे वाहन मालिकों पर आ रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह मामला अब स्थानीय व्यवसायियों के बीच गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पिछले कुछ वर्षों से रेंटल बाइक और स्कूटी का व्यवसाय शहर में तेजी से बढ़ा है। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अपने कमर्शियल दोपहिया वाहनों को पर्यटकों को किराये पर देकर आय का साधन बना रहे हैं। सोमवार से रविवार हर दिन बड़ी तादाद में पर्यटक इन वाहनों का उपयोग करते हैं। लेकिन अब यह कारोबार लगातार चालानों की वजह से घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
बाइक-स्कूटी रेंटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकित गुप्ता ने बताया कि लाइसेंस और परमिट के साथ वाहन प्रति दिन लगभग 600 रुपये किराये पर दिया जा रहा है। पर्यटक को हेलमेट भी उपलब्ध कराया जाता है ताकि ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए वाहन चलाया जा सके। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके, कई पर्यटक हेलमेट नहीं पहनते और हाईवे पर ओवर स्पीडिंग करते हैं, जिसके चलते एनपीआर कैमरे उनका चालान कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि चालान की ऑनलाइन जानकारी 24 से 48 घंटे बाद आती है, तब तक पर्यटक वाहन वापस कर चुके होते हैं। ऐसे में 1,000 से 2,000 रुपये तक का जुर्माना वाहन मालिकों को ही भरना पड़ रहा है।
अधिकारियों से इस विषय पर प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। कई अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि चालान व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो रेंटल कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच सकता है।
कई संचालकों ने बताया कि “पर्यटकों को बार-बार समझाने के बावजूद वे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं, और चालान का पूरा बोझ हम पर आ जाता है।”
विशेषज्ञ राय
ट्रैफिक प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में ‘यूज़र रिस्पॉन्सिबिलिटी’ मॉडल लागू करना चाहिए ताकि नियम तोड़ने वाले व्यक्ति की पहचान तुरंत हो सके और चालान सही व्यक्ति पर जाए, न कि वाहन मालिक पर।
आंकड़े / डेटा
- एक रेंटल वाहन का औसत किराया: ₹600 प्रतिदिन
- चालान की रकम: ₹1,000 से ₹2,000
- चालान संदेश आने का समय: 24–48 घंटे बाद
- प्रभावित रेंटल कारोबारियों की संख्या: बढ़ती हुई (आंकड़े उपलब्ध नहीं)
आगे क्या?
रेंटल एसोसिएशन ने घोषणा की है कि वे जल्द ही संभागीय परिवहन कार्यालय का घेराव करेंगे और चालान प्रक्रिया में सुधार की मांग रखेंगे। संचालकों का कहना है कि यदि पहचान और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था नहीं बदली गई, तो उनका व्यवसाय लंबे समय तक चलाना मुश्किल हो जाएगा।






