
लोहाघाट: चंपावत जिले के लोहाघाट विकासखंड में दो दिन से लापता 45 वर्षीय भुवन राम का शव बुधवार को वन विभाग ने मंगोली के पास जंगल से बरामद किया। शव के अधिकांश हिस्से को गुलदार खा चुका था, जिससे इलाके में दहशत का माहौल फैल गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत पिंजरा लगाने और मृतक के परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
लोहाघाट क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से गुलदार की वाढ़ती गतिविधियां स्थानीय निवासियों में भय पैदा कर रही हैं। कई गांवों में लोगों ने दिन और रात में गुलदार को आसपास घूमते देखा है। पहाड़ी इलाकों में मानव–वन्यजीव संघर्ष लगातार चिंता का विषय बना हुआ है।
घटना का विवरण
लोहाघाट के धूरा तोक निवासी भुवन राम मंगलवार से लापता थे। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि वह जंगल की ओर गए होंगे। बुधवार को वन विभाग द्वारा चलाए गए सर्च अभियान के दौरान मंगोली के पास जंगल में भुवन राम का क्षत-विक्षत शव मिला। वन विभाग के रेंजर नारायण दत्त पांडेय ने बताया कि शुरुआती जांच में स्पष्ट है कि भुवन राम को गुलदार ने अपना निशाना बनाया और शव का अधिकांश हिस्सा खा लिया।
लोहाघाट थाना निरीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के समय और हमले के तरीके की पुष्टि होगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
घटना के बाद आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने कहा कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में गुलदार की आमद बढ़ गई है, लेकिन अभी तक सुरक्षा के पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ा जाए और गांवों के आसपास नियमित गश्त बढ़ाई जाए।
स्थानीय प्रतिनिधि पूरन सिंह सामंत ने कहा: “ग्रामीण लगातार दहशत में हैं। प्रशासन तुरंत पिंजरा लगाए और सुरक्षा उपाय बढ़ाए। यदि कार्रवाई न हुई तो गुलदार के और हमलों का खतरा है।”
वन विभाग और प्रशासन की प्रतिक्रिया
वन विभाग ने बताया कि मृतक के परिवार को नियमों के तहत मुआवजा दिया जाएगा। टीमें मौके पर गश्त बढ़ा रही हैं और आसपास के क्षेत्र में निगरानी तेज कर दी है। पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले जंगल में न जाने की सलाह दे रहे हैं।
आगे क्या?
प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर गुलदार की गतिविधि जारी रही तो पिंजरा लगाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। गांवों के आसपास नाइट पेट्रोलिंग और टीमों की तैनाती बढ़ाई जा सकती है। ग्रामीणों को वन्यजीव विभाग के हेल्पलाइन नंबर भी मुहैया कराए जाएंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क किया जा सके।







