
देहरादून: बिल्डरों और शराब कारोबारियों पर की गई आयकर विभाग की हालिया छापेमारी को विभाग के इन्वेस्टिगेशन विंग ने पूरी तरह गोपनीय रखा। इस बड़े अभियान में सिर्फ इन्वेस्टिगेशन विंग के कार्मिकों को शामिल किया गया, जबकि असेसमेंट विंग के कर्मचारियों को पूरी तरह बाहर रखा गया। विभाग को इस कार्रवाई में कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिलने की जानकारी सामने आई है।
गोपनीय तरीके से आयोजित की गई कार्रवाई
आयकर विभाग आमतौर पर बड़े छापों में इन्वेस्टिगेशन और असेसमेंट दोनों विंगों की टीम शामिल करता है। लेकिन इस बार पूरी छापेमारी सिर्फ इन्वेस्टिगेशन विंग के कर्मचारियों द्वारा की गई। उत्तराखंड की इन्वेस्टिगेशन विंग अन्य राज्यों की तुलना में छोटी है, फिर भी विभाग ने प्रदेशभर से अधिकारियों को बुलाकर लगभग 100 सदस्यों की टीम तैयार की। सूत्रों के अनुसार, विभाग को अपनी रणनीति के अनुसार इस छापेमारी में पर्याप्त सफलता मिलती दिख रही है।
लाल तप्पड़ में निर्माणाधीन होटल की जांच
आयकर विभाग की निगरानी में बिल्डर इंदर खत्री का डोईवाला के पास लाल तप्पड़ क्षेत्र में बन रहा एक आलीशान होटल भी आया है।
- होटल के आसपास बिल्डर की दर्जनों बीघा जमीन मौजूद है।
- विभाग ने होटल निर्माण, खर्च और जमीन के लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की गहराई से जांच की।
सूत्रों का कहना है कि कई आर्थिक गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज विभाग की जांच के दायरे में हैं।
संदिग्ध ट्रांजेक्शन और सफेदपोशों के नाम सामने
आयकर विभाग की जांच में कुछ ऐसे ट्रांजेक्शन पाए गए हैं जिन्हें बिल्डरों और शराब कारोबारियों ने अपने आयकर रिटर्न में शामिल नहीं किया था। लंबे समय से इन कारोबारियों के रिटर्न की समीक्षा के बाद विभाग ने कड़ी दर कड़ी जोड़कर इनके बीच हुए आपसी वित्तीय लेन-देन को चिन्हित किया।
जांच में ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं जिनमें कुछ सफेदपोशों, राजनेताओं और अधिकारियों के नामों की संभावित हिस्सेदारी का संकेत मिला है। हालांकि, अधिकारी फिलहाल किसी नाम की पुष्टि करने से बच रहे हैं।
रियल एस्टेट और शराब कारोबार में काले धन का इस्तेमाल
आयकर अधिकारियों के अनुसार, उत्तराखंड में रियल एस्टेट और शराब कारोबार लंबे समय से काला धन खपाने के प्रमुख माध्यम माने जाते हैं।
- दोनों सेक्टर में बड़े लेन-देन कैश में होते हैं।
- बड़ी मात्रा में आय रिटर्न में नहीं दिखाई जाती।
- खरीद-बिक्री की चेन लंबी होने से जांच में धीरे-धीरे कई कड़ियां उजागर हो जाती हैं।
इस मामले में भी विभाग को ट्रांजेक्शन की कई कड़ियां मिल रही हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई तेज हो सकती है।
आगे की जांच जारी
आयकर विभाग इस समय जब्त किए गए दस्तावेजों का विश्लेषण कर रहा है और संबंधित बिल्डरों तथा कारोबारियों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लेन-देन की वास्तविक प्रकृति क्या थी।






