
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की “जीरो टॉलरेंस फॉर करप्शन” नीति के तहत सरकार ने वन विभाग में पूर्व में हुए भ्रष्टाचार मामलों पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने राजाजी नेशनल पार्क में वर्ष 2013 में हुए वन आरक्षी भर्ती घोटाले में आरोपित तत्कालीन उप निदेशक एच.के. सिंह के खिलाफ जांच बैठाई है, जबकि कालागढ़ टाइगर रिजर्व के तत्कालीन डीएफओ अखिलेश तिवारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुकदमा चलाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अनुमति दी गई है।
राजाजी नेशनल पार्क भर्ती घोटाला: जांच फिर से शुरू
वर्ष 2013 में राजाजी नेशनल पार्क में दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को वन आरक्षी पदों पर भर्ती करने का निर्णय लिया गया था। तत्कालीन उप निदेशक एच.के. सिंह ने 28 वन रक्षकों की नियुक्ति की थी, लेकिन बाद में यह मामला विवादों में आ गया। जांच में पाया गया कि नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी और चहेतों को तरजीह दी गई।
नियम के अनुसार केवल वे दैनिक वेतनभोगी शामिल हो सकते थे जिन्होंने कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूरी की हो, लेकिन कई मामलों में आयु सीमा घटाई-बढ़ाई गई और अपात्र उम्मीदवारों को चयनित कर लिया गया।
उस समय जांच के आदेश तो दिए गए, लेकिन कार्रवाई अधर में लटक गई थी। अब मुख्यमंत्री धामी ने इस प्रकरण को फिर से खोलते हुए प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) रंजन कुमार मिश्र को जांच अधिकारी और चकराता डीएफओ वैभव कुमार सिंह को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नामित किया है।
कालागढ़ टाइगर रिजर्व मामला: ईडी को मिली अनुमति
वहीं, कालागढ़ टाइगर रिजर्व के तत्कालीन डीएफओ अखिलेश तिवारी पर पाखरो टाइगर सफारी प्रकरण और मनी लॉन्ड्रिंग में आरोप हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने राज्य सरकार से उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी, जिसे अब मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी है।
यह कार्रवाई उत्तराखंड में वन विभाग में पूर्व में हुए वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों पर सरकार की सख्त मंशा को दर्शाती है। मुख्यमंत्री धामी ने साफ कहा है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“जीरो टॉलरेंस” नीति पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार यह दोहरा रहे हैं कि राज्य में पारदर्शी शासन ही सरकार की प्राथमिकता है। हाल के महीनों में कई विभागों में पुराने मामलों की फाइलें खोली गई हैं, जिनमें वन विभाग प्रमुख रूप से शामिल है। सरकार का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से जन विश्वास बहाल होगा और विभागों में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ेगी।







