
नैनीताल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार सुबह कैंची धाम पहुंचेंगी, जहां वह बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन करेंगी। सुरक्षा कारणों से मंगलवार सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रतिबंधित रखी गई है। दर्शन के बाद राष्ट्रपति कुमाऊं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होकर 18 मेधावी विद्यार्थियों को पदक प्रदान करेंगी।
कैंची धाम में आज राष्ट्रपति का दौरा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आज का कार्यक्रम धार्मिक और शैक्षणिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वह सुबह करीब 9 बजे कैंची धाम मंदिर पहुंचेंगी, जहां बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगी। कैंची धाम मंदिर समिति ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक श्रद्धालुओं की एंट्री बंद रखने का निर्णय लिया है।
मंदिर परिसर में प्रशासन, पुलिस और एसपीजी की ओर से सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं।
कुमाऊं विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह
कैंची धाम के दर्शन के बाद राष्ट्रपति मुर्मू नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगी। इस दौरान वह 18 मेधावी छात्रों को स्वर्ण और रजत पदक प्रदान करेंगी।
कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उच्च शिक्षा मंत्री और विश्वविद्यालय के कुलपति सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
राजभवन की 125वीं वर्षगांठ पर वर्चुअल टूर लॉन्च
इससे पहले सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजभवन नैनीताल की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने इस मौके पर राजभवन के वर्चुअल टूर (Virtual Tour) का लोकार्पण किया, जो अब जनता governoruk.gov.in वेबसाइट पर देख सकेगी।
राष्ट्रपति ने कहा —
“इस वर्चुअल टूर के माध्यम से लोग ऐतिहासिक राजभवन के स्थापत्य सौंदर्य, प्राकृतिक विरासत और इसके गौरवशाली इतिहास को डिजिटल रूप में देख सकेंगे।”
राजभवन पर लघु फिल्म भी हुई प्रदर्शित
राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में एक लघु फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें नैनीताल की स्थापत्य कला, ऐतिहासिक महत्व और राजभवन की भूमिका को विस्तार से दर्शाया गया। फिल्म के माध्यम से दर्शकों को यह बताया गया कि किस तरह यह भवन स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र और प्रगति का प्रतीक बन गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि —
“जैसे दिल्ली का राष्ट्रपति भवन राष्ट्र की एकता का प्रतीक है, वैसे ही राज्यों में राजभवन लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक हैं। उत्तराखंड का यह राजभवन राज्य की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बन गया है।”







