
देहरादून: उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर कांग्रेस ने शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देकर रजत जयंती समारोह पखवाड़े की शुरुआत की। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राज्य का 25 साल का पहला पड़ाव “संतोषजनक रहा, लेकिन अब भी कई चुनौतियां बाकी हैं।” उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को अपने “हिमालयी राज्य की मूल अवधारणा” की ओर लौटने की जरूरत है।
कांग्रेस ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि
रजत जयंती समारोह की शुरुआत कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर की। कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने राज्य आंदोलन के जनगीत गाकर शहीदों को नमन किया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य सहित कई वरिष्ठ नेता इस मौके पर मौजूद रहे।
हरीश रावत बोले — “25 साल का सफर संतोषजनक, पर अधूरा”
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि
“उत्तराखंड का 25 साल का सफर संतोषजनक रहा, लेकिन अभी भी कई ऐसी कमियां और चुनौतियां हैं जिन्हें दूर करना जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि राज्य के गठन का उद्देश्य केवल नया प्रशासनिक ढांचा बनाना नहीं था, बल्कि महिलाओं, गरीब ग्रामीणों, मजदूरों और युवाओं को सशक्त बनाना भी था।
रावत ने आगे कहा,
“विशेष सत्र अगर भराणीसैंण में होता तो बेहतर होता। हिमालय को सामने रखकर हम यह संकल्प लेते कि जिस अवधारणा के तहत देश की संसद ने इस राज्य की कल्पना की थी, हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन अफसोस है कि हम अब भी देहरादून में ही सीमित रह गए।”
“राजनीतिक अस्थिरता से खोया विकास का समय”
हरीश रावत ने राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर कहा कि
“पिछले 25 वर्षों में कई बार अस्थिरता, भूलें और चूकें हुई हैं। लेकिन अब समय है कि हम आत्ममंथन करें और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ें। उत्तराखंड के पास एक शानदार और गौरवशाली भविष्य बनाने की क्षमता है।”
करन माहरा बोले — “दो दिन का सत्र राज्य के साथ मजाक”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि
“दो दिन के विधानसभा सत्र को विशेष सत्र कहना राज्य का अपमान है। विधायकों को सवाल पूछने का मौका तक नहीं दिया गया। जनता के मुद्दे — भर्ती घोटाले, आपदा राहत, और भ्रष्टाचार — पर सरकार जवाब देने से बच रही है।”
उन्होंने कहा कि राज्य अब भी आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप नहीं बन पाया है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का हमला
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि
“पिछले 25 वर्षों में असंतुलित विकास, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और सड़कों की समस्या बनी हुई है। राज्य पर अब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है। पलायन की वजह से गांव खाली हो रहे हैं और भू-कानून अब भी जनभावना के अनुरूप नहीं है।”
उन्होंने कहा कि नौ हिमालयी राज्यों में महिला अपराध में उत्तराखंड पहले स्थान पर है, जबकि एक रिपोर्ट के अनुसार हर दिन तीन बच्चे राज्य से लापता हो रहे हैं — यह स्थिति चिंताजनक है।
कांग्रेस ने उठाया “हिमालयी अवधारणा” का मुद्दा
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड का निर्माण एक “हिमालयी राज्य की पहचान और संवेदनशीलता” के आधार पर हुआ था,
लेकिन पिछले दो दशकों में विकास की दिशा शहरों तक सिमट गई। रावत ने कहा कि अब जरूरत है कि सरकार ग्रामीण और सीमांत इलाकों पर ध्यान केंद्रित करे, जहां से राज्य आंदोलन की आवाज उठी थी।
Rishikesh News आगे भी उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती से जुड़े राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की रिपोर्ट पाठकों तक पहुंचाता रहेगा। यदि आपके क्षेत्र में भी रजत जयंती या आंदोलनकारियों से जुड़ा आयोजन हुआ हो, तो हमें फोटो और जानकारी भेजें — 📩 rishikeshnews.com@gmail.com







