
पौड़ी: उत्तराखंड परिवहन महासंघ के आह्वान पर कमर्शियल वाहन चालकों की हड़ताल ने पौड़ी जिले को ठप कर दिया। जीएमओयू की 10 से अधिक रूट बसें और डिपो की 40+ बसें पूरे दिन खड़ी रहीं, जबकि टैक्सी-मैक्सी सेवाएं कोटद्वार, श्रीनगर, देहरादून, खिर्सू, कल्जीखाल समेत दर्जनों लिंक रोडों पर बंद रहीं। नतीजा – हजारों यात्री बस अड्डों पर घंटों इंतजार करते रहे, और सबसे बड़ा झटका राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रहे पौड़ी के युवा एथलीटों को लगा, जो देहरादून नहीं पहुंच सके।
हड़ताल का व्यापक असर: बस अड्डे सूने, सड़कें वीरान
पौड़ी टैक्सी-मैक्सी कल्याण समिति के अध्यक्ष राकेश रावत ने बताया कि हड़ताल के समर्थन में कोटद्वार, श्रीनगर, देहरादून, कालेश्वर, अगरोड़ा, कांसखेत, खिर्सू कोट, कल्जीखाल, देहलचौरी, टंगरोली, पैठाणी, त्रिपालीसैंण, पातल और अन्य रूटों पर कोई कमर्शियल वाहन नहीं चला। सुबह से बस अड्डों पर यात्रियों की लंबी कतारें लगी रहीं, लेकिन गाड़ियां नदारद।
हालांकि, रोडवेज बसें सामान्य रूप से चलीं – देहरादून, बीरोंखाल, श्रीनगर और त्रिपालीसैंण रूट पर सेवाएं जारी रहीं। बुआखाल से देहरादून की बसें पूरी तरह भरी हुईं पहुंचीं, जबकि बीरोंखाल रूट पर हर सीट फुल रही। पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
स्कूल बसें और इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं, लेकिन दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों को निजी वाहनों या लिफ्ट का सहारा लेना पड़ा। कई यात्रियों ने महंगे प्राइवेट किराए देकर सफर किया।
खिलाड़ियों की मेहनत पर पानी: “जिले का नाम रोशन करने का सपना अधूरा”
हड़ताल का सबसे दर्दनाक असर पौड़ी के युवा खिलाड़ियों पर पड़ा। बुधवार को दर्जनों एथलीट राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता के लिए देहरादून रवाना होने वाले थे, लेकिन जीएमओयू, टैक्सी और मैक्सी के बंद रहने से उनकी बसें रद्द हो गईं।
सिमरन गुसाईं, छात्रा और एथलीट ने ईटीवी भारत से कहा:
“मैंने अपनी विद्यालयी परीक्षाएं छोड़कर महीनों तैयारी की थी। जिले का नाम रोशन करने का सपना था, लेकिन हड़ताल ने सब चौपट कर दिया। न गाड़ी मिल रही, न किराया अफोर्ड कर पा रहे।”
शिक्षकों ने बताया कि विभिन्न स्कूलों से आए 50+ खिलाड़ी फंसे हुए हैं। एक शिक्षक ने चेतावनी दी:
“अगर आज देहरादून नहीं पहुंचे तो registration कैंसिल हो जाएगा। प्रशासन को खिलाड़ियों के लिए स्पेशल बस या वाहन की व्यवस्था करनी चाहिए थी।”
कई एथलीटों ने प्राइवेट टैक्सी बुक करने की कोशिश की, लेकिन किराया 3-4 गुना ज्यादा मांगा जा रहा था। नतीजतन, अधिकांश पौड़ी में ही रुके हुए हैं।
हड़ताल क्यों? परिवहन महासंघ की मांगें
उत्तराखंड परिवहन महासंघ ने हड़ताल का आह्वान हिट एंड रन कानून में संशोधन, ओवरलोडिंग पर सख्ती में छूट, परमिट फीस में राहत और चालक कल्याण योजनाओं की मांग को लेकर किया है। चालक नेता बोले – “जब तक सरकार बातचीत नहीं करेगी, हड़ताल जारी रहेगी।”
पौड़ी में यह हड़ताल बुधवार को भी पूरे जोर पर रही, और गुरुवार को भी जारी रहने की संभावना है।







