
पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील योजना के तहत बच्चों को परोसे जाने वाले दूध में गंभीर लापरवाही सामने आई है। कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए भेजे गए दूध के पैकेट एक्सपायरी डेट के साथ पाए गए, और पैकेटों पर अंकित उत्पादन व उपयोग की तिथियों में भी भारी गड़बड़ पाई गई। शिक्षकों द्वारा इस मामले का खुलासा होने के बाद अभिभावकों और शिक्षकों में रोष है। जिला शिक्षा विभाग ने जांच की बात कही है, लेकिन इस गंभीर लापरवाही पर पर्दा डालने के आरोप भी लग रहे हैं।
मिड-डे-मील में एक्सपायरी दूध
मिड-डे-मील योजना के तहत पिथौरागढ़ जिले के सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठवीं तक के लगभग 12,000 से अधिक विद्यार्थियों को सप्ताह में दो दिन 10 ग्राम फोर्टिफाइड दुग्ध चूर्ण गरम पानी में घोलकर दिया जाता है। हाल ही में स्कूलों में दूध की आपूर्ति हुई, लेकिन जब शिक्षकों ने पैकेटों की जांच की तो वे हैरान रह गए। पैकेटों पर उत्पादन की तिथि 24 सितंबर 2020 और उपयोग की अंतिम तिथि 21 मार्च 2020 अंकित थी। यह तारीखें तार्किक रूप से गलत हैं, क्योंकि उपयोग की अंतिम तिथि उत्पादन की तिथि से पहले कैसे हो सकती है?
शिक्षकों और अभिभावकों में रोष
इस गड़बड़ी ने शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों में सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि एक्सपायरी दूध की आपूर्ति बच्चों की सेहत और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। एक शिक्षक ने कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है। बच्चों को ऐसा दूध देना उनके स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकता है। इसकी तुरंत जांच होनी चाहिए।” अभिभावकों ने भी इस लापरवाही की कड़ी निंदा की और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विभाग का जवाब और जांच के आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक), पिथौरागढ़, तरुण कुमार पंत ने बताया, “दूध उत्पादन करने वाली कंपनी से इस मामले में बात की गई है। कंपनी ने इसे प्रिंटिंग की गलती बताया है। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। मामले की जांच के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।”
हालांकि, शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि प्रिंटिंग की गलती का बहाना बनाकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। वे मांग कर रहे हैं कि दूध की गुणवत्ता और आपूर्ति प्रक्रिया की गहन जांच हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
बच्चों की सेहत पर सवाल
मिड-डे-मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, लेकिन इस तरह की लापरवाही से योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। जिले में पहले भी मिड-डे-मील में खराब गुणवत्ता के भोजन की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इस घटना ने शिक्षा विभाग और आपूर्तिकर्ताओं की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।







