
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट में हेमवती नंदन बहुगुणा (एचएनबी) केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के कर्मचारियों के बकाया वेतन और यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों मामलों की अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर 2025 की तारीख तय की। वेतन मामले में केंद्र और राज्य सरकार के बीच जिम्मेदारी का विवाद गहरा गया है, जिसके चलते कर्मचारियों को रोजी-रोटी का संकट झेलना पड़ रहा है। वहीं, यूसीसी नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई।
एचएनबी कर्मचारियों का वेतन विवाद: केंद्र बनाम राज्य सरकार
एचएनबी केंद्रीय विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त कई कॉलेजों के कर्मचारियों को लंबे समय से वेतन नहीं मिला है। इस मामले में दायर याचिकाओं में कहा गया कि 2024 में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, और विश्वविद्यालय के बीच हुई एक बैठक में निर्णय लिया गया था कि जब तक यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, तब तक कर्मचारियों का वेतन राज्य सरकार देगी। लेकिन राज्य सरकार ने इस निर्णय का पालन नहीं किया, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया, “कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है। उनके परिवारों को रोजी-रोटी के लाले पड़ रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं।” इससे पहले, कोर्ट ने एक जनहित याचिका में आदेश दिया था कि कर्मचारियों का वेतन केंद्र सरकार देगी, लेकिन इसका भी अनुपालन नहीं हुआ।
राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि एचएनबी एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, इसलिए वेतन का दायित्व केंद्र सरकार का है। इसके जवाब में केंद्र ने तर्क दिया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन होने तक राज्य सरकार को वेतन देना चाहिए। इस गतिरोध के बीच कर्मचारियों की स्थिति बदतर होती जा रही है। खंडपीठ ने दोनों पक्षों को 10 नवंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
यूसीसी मामले में सुनवाई: नियमावली में संशोधन पर चर्चा
इसी दिन हाईकोर्ट में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) से संबंधित लगभग एक दर्जन याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं में सुरेश सिंह नेगी, अलमासुद्दीन सिद्दीकी, और अन्य शामिल हैं, जिन्होंने यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती दी है।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि उसने यूसीसी नियमावली में संशोधन के लिए हलफनामा दाखिल किया है। सरकार संशोधनों को अंतिम रूप देने में जुटी है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने प्रस्तावित संशोधनों का अध्ययन करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र ने अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर की तारीख तय की।
याचिकाकर्ता सुरेश सिंह नेगी ने कहा, “हम चाहते हैं कि यूसीसी लागू हो, लेकिन यह सभी समुदायों के लिए निष्पक्ष और समावेशी हो। संशोधनों का अध्ययन जरूरी है।” यह मामला उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया को और जटिल बनाता है, क्योंकि विभिन्न समुदायों ने इसके कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।
पृष्ठभूमि: कर्मचारियों और यूसीसी का विवाद
एचएनबी केंद्रीय विश्वविद्यालय उत्तराखंड के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में से एक है, जिसके तहत कई कॉलेज संचालित होते हैं। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, इन कॉलेजों में लगभग 2,000 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से कई को पिछले 6-12 महीनों से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों ने कई बार प्रदर्शन किए, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के बीच जिम्मेदारी का पेंच फंसने से कोई समाधान नहीं निकला।
वहीं, यूसीसी उत्तराखंड में एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। 2024 में लागू यूसीसी को लेकर विभिन्न समुदायों ने अपनी चिंताएं जताई हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियमावली में कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और संशोधन की जरूरत है। सरकार ने संशोधनों का वादा किया है, लेकिन इसकी प्रक्रिया में देरी ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
जवाबदेही और निष्पक्षता की जरूरत
उत्तराखंड हाईकोर्ट की यह सुनवाई दो महत्वपूर्ण मुद्दों—कर्मचारियों के वेतन और यूसीसी नियमावली—पर केंद्रित रही। एचएनबी कर्मचारियों का वेतन विवाद केंद्र और राज्य सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाता है। दूसरी ओर, यूसीसी पर संशोधनों की प्रक्रिया उत्तराखंड में सामाजिक और कानूनी संतुलन की चुनौती को दर्शाती है।
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों मामलों को गंभीरता से लिया है। 10 नवंबर की सुनवाई में केंद्र और राज्य सरकार के जवाब इस मामले की दिशा तय करेंगे। कर्मचारियों और याचिकाकर्ताओं की नजर अब कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी है। क्या उत्तराखंड सरकार और केंद्र इन मुद्दों का जल्द समाधान कर पाएंगे?







