
ऋषिकेश: राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक चौरासी कुटिया का व्यापक जीर्णोद्धार कार्य शुरू हो गया है। लगभग 16 महीने बाद, यानी अप्रैल 2027 तक यह स्थल नए कलेवर में नजर आएगा। करीब 101 करोड़ रुपये की लागत से 84 ध्यान कुटियाओं और अन्य भवनों का पुनरोद्धार किया जा रहा है, जबकि मूल स्वरूप में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। लोक निर्माण विभाग इस कार्य को अंजाम दे रहा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
स्वर्गाश्रम क्षेत्र के पास स्थित यह परिसर वर्ष 1961 में महर्षि महेश योगी द्वारा स्थापित किया गया था। उन्होंने वन विभाग से 15 एकड़ भूमि लीज पर लेकर यहां शंकराचार्य नगर की स्थापना की। भावातीत ध्यान योग के लिए यह केंद्र विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ।
यह परिसर 1980 में राजाजी नेशनल पार्क (अब राजाजी टाइगर रिजर्व) की सीमा में आने के बाद 1985 में बंद कर दिया गया था। तीन दशक तक यह स्थल उपेक्षित रहा। 8 दिसंबर 2015 को इसे नेचर ट्रेल और बर्ड वाचिंग के लिए फिर से खोला गया।
बीटल्स से जुड़ी विरासत
इस स्थल को अंतरराष्ट्रीय पहचान तब मिली जब इंग्लैंड का प्रसिद्ध बैंड The Beatles वर्ष 1968 में यहां आया। जॉन लेनन, पॉल मैककार्टनी, रिंगो स्टार और जॉर्ज हैरिसन ने यहां लगभग 45 दिन बिताए और कई गीतों की रचना की, जो बाद में विश्वप्रसिद्ध एलबमों का हिस्सा बने। इसके बाद यह स्थान ‘बीटल्स आश्रम’ के नाम से भी जाना जाने लगा।
क्या-क्या होंगे कार्य
योजना के तहत यहां कैफे, योग-ध्यान हाल, पौराणिक रसोई, हर्बल गार्डन और अतिथि गृहों का विकास किया जाएगा। 84 कुटियाओं के अंदर नया प्लास्टर किया जा रहा है और क्षतिग्रस्त पत्थरों को दुरुस्त किया जा रहा है।
पर्यटकों की सुविधा के लिए नया प्रवेश और निकासी द्वार, टिकट काउंटर तथा वाहन पार्किंग की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
वर्तमान व्यवस्था
वर्तमान में यहां भारतीय पर्यटकों से 200 रुपये और विदेशी पर्यटकों से 1,200 रुपये प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क लिया जाता है। सुबह 10 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक प्रवेश की अनुमति है और शाम 4 बजे तक स्थल खाली करना होता है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
गौहरी रेंज के रेंजर आर.सी. जोशी ने बताया कि कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 16 माह में पूरा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि मूल संरचना को सुरक्षित रखते हुए संरक्षण कार्य किया जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि जीर्णोद्धार के बाद क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। कई लोगों का मानना है कि यह परियोजना ऋषिकेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देगी।
आगे क्या होगा
अप्रैल 2027 तक कार्य पूरा होने की संभावना है। इसके बाद चौरासी कुटिया आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यटकों और साधकों के लिए अधिक व्यवस्थित रूप में उपलब्ध होगी।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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