
रानीपोखरी: रानीपोखरी न्याय पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांवों के नागरिकों ने प्रस्तावित लॉ यूनिवर्सिटी की भूमि को एयरपोर्ट विस्थापितों को आवंटित किए जाने की चर्चाओं के विरोध में रविवार को सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए सुरक्षित इस भूमि का स्वरूप बदला गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
धरने को संबोधित करते हुए भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया कि वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा इस भूमि को लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए आवंटित किया गया था और इसका विधिवत शिलान्यास भी हुआ था। इससे क्षेत्र के युवाओं में शिक्षा और रोजगार को लेकर उम्मीद जगी थी। अब इस भूमि को एयरपोर्ट विस्तार के कारण विस्थापितों को बसाने के लिए देने की बात सामने आने से लोगों में नाराजगी है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि निर्णय लेने से पहले स्थानीय हितधारकों से परामर्श आवश्यक है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
किसान मोर्चा के गढ़वाल सह-संयोजक अनूप चौहान ने कहा कि लॉ यूनिवर्सिटी क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती थी। ग्रामीणों का मानना है कि विस्थापितों का पुनर्वास कहीं और किया जाना चाहिए, न कि उस भूमि पर जो शैक्षणिक उद्देश्य के लिए सुरक्षित है। धरने में शामिल लोगों ने इसे क्षेत्र की जनता के साथ विश्वासघात बताया।
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आगे क्या होगा
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि लॉ यूनिवर्सिटी परियोजना को यथावत रखा जाए और वैकल्पिक भूमि पर पुनर्वास की योजना बनाई जाए।
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