
देहरादून: उत्तराखंड सरकार प्रदेश में हेली कनेक्टिविटी और हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाने जा रही है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तरकाशी जिले की चिन्यालीसौड़ और चमोली जिले की गौचर हवाई पट्टियों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच बड़ा एग्रीमेंट होने जा रहा है। इस समझौते के तहत इन हवाई पट्टियों को संयुक्त रूप से नागरिक और सैन्य संचालन के लिए विकसित किया जाएगा। इससे न सिर्फ सीमांत जिलों तक पहुंच आसान होगी, बल्कि पर्यटन, धार्मिक यात्राओं और आपदा प्रबंधन के लिहाज़ से भी राज्य को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
उत्तराखंड भौगोलिक रूप से दुर्गम और आपदा-संवेदनशील राज्य है, जहां कई इलाकों तक सड़क मार्ग से पहुंचने में लंबा समय लगता है। मानसून या आपदा के दौरान कई बार संपर्क पूरी तरह बाधित हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार हेली कनेक्टिविटी के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। चिन्यालीसौड़ और गौचर जैसी हवाई पट्टियां पहले से मौजूद हैं, जिन्हें अब उन्नत रूप देकर बहुउद्देश्यीय उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव सचिन कुर्वे ने बताया कि चिन्यालीसौड़ और गौचर दोनों ही एडवांस लैंडिंग ग्राउंड हैं और इन्हें लेकर भारतीय वायुसेना, रक्षा मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के बीच जल्द ही एग्रीमेंट किया जाएगा, जिसे मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है।
इस समझौते के तहत ये हवाई पट्टियां अगले 30 वर्षों के लिए रक्षा मंत्रालय को लीज पर दी जाएंगी। एटीसी, सीएनएस, टैक्सी-वे और रन-वे के ऑपरेशन व मेंटेनेंस की जिम्मेदारी वायुसेना निभाएगी, जबकि सिविल टर्मिनल भवनों का रखरखाव और संचालन राज्य सरकार के जिम्मे रहेगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस फैसले से दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी और आपदा के समय राहत-बचाव कार्यों में तेजी आएगी। व्यापारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि बेहतर हवाई संपर्क से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नया बढ़ावा मिलेगा।
आंकड़े और तथ्य
वर्तमान में देहरादून से चिन्यालीसौड़ और गौचर के लिए हेली सेवाएं संचालित हो रही हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के बाद इन रूट्स को भविष्य में फिक्स्ड विंग विमानों से जोड़ना भी संभव हो सकेगा, जिससे यात्रियों की संख्या और उड़ानों की क्षमता बढ़ेगी।
आगे क्या होगा
एग्रीमेंट के लागू होने के बाद इन दोनों हवाई पट्टियों पर संयुक्त संचालन शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही नागरिक उड्डयन विभाग अल्मोड़ा, पौड़ी और चंपावत जैसे जिलों को भी हेली कनेक्टिविटी से जोड़ने पर फोकस कर रहा है, ताकि राज्य के अधिक से अधिक दुर्गम इलाकों तक हवाई सेवाएं पहुंच सकें।
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