
नैनीताल: शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप से जुड़े एक मामले में निचली अदालत में चल रही आपराधिक कार्रवाई पर नैनीताल हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट का मानना है कि प्रथम दृष्टया मामला विचारणीय है और अंतिम निर्णय तक कार्रवाई जारी रखना उचित नहीं होगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
मामला 1 नवंबर 2023 का है, जब बाजपुर थाने में एक युवक के खिलाफ मारपीट, दुष्कर्म और धमकाने के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पीड़िता का आरोप था कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
पुलिस ने जांच पूरी कर 3 जनवरी 2024 को चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद 8 अक्टूबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट, बाजपुर ने आरोपी को तलब करते हुए समन जारी किया था।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही शिकायतकर्ता पक्ष को भी तीन दिनों के भीतर नोटिस जारी करने के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका के अंतिम निपटारे तक निचली अदालत में विचाराधीन कार्यवाही स्थगित रहेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप तब होता है, जब रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया कानूनी प्रश्न विचार योग्य प्रतीत होते हैं। मामले में आगे की सुनवाई पर सभी पक्षों की दलीलें अहम होंगी।
आंकड़े और तथ्य
याचिकाकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 (पूर्व में सीआरपीसी की धारा 482 के समकक्ष) के तहत याचिका दायर कर चार्जशीट और पूरी आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने की मांग की है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क रखा कि इसी मामले में हाईकोर्ट की एक अन्य खंडपीठ पहले ही आरोपी को अंतरिम अग्रिम जमानत दे चुकी है।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक बाजपुर न्यायालय में चल रही कार्यवाही पर रोक प्रभावी रहेगी। कोर्ट में राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के जवाब के बाद आगे की दिशा तय होगी।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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