
हरिद्वार: यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद हरिद्वार में ब्राह्मण समाज की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। फैसले के बाद ब्राह्मण समाज के लोगों ने मालवीय घाट पर मां गंगा की पूजा-अर्चना और दुग्धाभिषेक किया। इस दौरान समाज के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सराहना करते हुए सरकार से बुद्धि-शुद्धि की कामना की।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध की आवाजें उठती रही हैं। इन नियमों को लेकर ब्राह्मण समाज में असंतोष था, जिसे वे अपनी सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के खिलाफ मानते हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर रोक लगाए जाने के बाद हरिद्वार में इसे राहत के रूप में देखा गया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के दौरान निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी वेदमूर्ति गिरी ने यूजीसी के नए नियमों को काला कानून बताते हुए कहा कि समाज को बांटने वाले किसी भी प्रावधान को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने समय रहते हस्तक्षेप कर समाज को राहत दी है, जबकि सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि देशभर में हुए विरोध के बावजूद सरकार की ओर से अनदेखी की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। वहीं कथावाचक पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि यूजीसी के नए नियम सवर्ण समाज पर कुठाराघात हैं और भविष्य में यदि ऐसे नियम दोबारा लाए गए तो समाज इसका कड़ा विरोध करेगा।
आगे क्या होगा
ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि फिलहाल यह विरोध सांकेतिक है, लेकिन यदि भविष्य में यूजीसी के ऐसे नियम दोबारा लागू करने का प्रयास किया गया, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। समाज ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इन नियमों को पूरी तरह निरस्त किया जाए।







