
देहरादून: गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने के लिए गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने गुरुवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, कृषि नवाचार को प्रोत्साहन और गढ़वाल के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना रहा। बैठक में क्षेत्रीय कृषि को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गढ़वाल क्षेत्र में पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों के चलते जैविक और प्राकृतिक खेती की व्यापक संभावनाएं हैं। हालांकि, उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता मानकों और विपणन के अभाव में किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए केंद्र और क्षेत्रीय स्तर पर समन्वित प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया गया।
आधिकारिक जानकारी
बैठक के दौरान गढ़वाल क्षेत्र में Centre of Excellence की स्थापना को लेकर सकारात्मक और गंभीर विचार-विमर्श हुआ। इस केंद्र के माध्यम से कृषि, बागवानी, जैविक उत्पादन और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने की योजना पर चर्चा की गई, ताकि किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिल सके। इसके साथ ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा विदेशों में कुछ प्रमुख स्थान चिन्हित कर गढ़वाल के किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, आधुनिक उत्पादन प्रणालियों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर भी सहमति बनी।
स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान
बैठक में फलों की नई और उन्नत किस्मों के उत्पादन, उनके प्रभावी विपणन और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष चर्चा हुई। इससे गढ़वाल के सेब, कीवी, माल्टा, आड़ू सहित अन्य पर्वतीय उत्पादों को नई पहचान मिलने की संभावना है। मंत्री पीयूष गोयल ने प्रस्तावों पर शीघ्र ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशिक्षण, विपणन और निर्यात को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाया गया तो पर्वतीय क्षेत्रों में खेती फिर से लाभकारी बन सकती है। इससे युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
आगे क्या होगा
सांसद अनिल बलूनी ने बताया कि इससे पहले गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के सभी जिलाधिकारियों के साथ जैविक खेती की वर्तमान स्थिति और इसे बढ़ावा देने के प्रयासों पर विस्तृत चर्चा की जा चुकी है और जिलों से रिपोर्ट भी मंगाई गई है। अब केंद्रीय मंत्रालय के मार्गदर्शन और जिलाधिकारियों के सहयोग से गढ़वाल में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को नई दिशा मिलेगी, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।







