
देहरादून: उत्तराखंड कैबिनेट ने राज्य में गैर कृषिकारी उपयोग के लिए भूजल निकासी पर जल मूल्य-प्रभार लागू करने की मंजूरी दे दी है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी और इसमें कृषि, कृषि से जुड़े कार्यों तथा राजकीय पेयजल व्यवस्था को बाहर रखा गया है। नई व्यवस्था के तहत सुरक्षित, अर्द्धगंभीर, गंभीर और अति दोहित क्षेत्रों के अनुसार तथा उपयोग की प्रकृति के हिसाब से अलग-अलग दरें तय की गई हैं। सरकार का उद्देश्य भूजल के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगाना और इसके संरक्षण को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य के कई शहरी और पर्यटक क्षेत्रों में भूजल का अत्यधिक उपयोग लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। होटल, वॉटर एम्यूजमेंट पार्क, वाहन धुलाई केंद्र, स्विमिंग पूल, रेजीडेंशियल अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी जैसे स्थानों पर बड़ी मात्रा में भूजल का उपयोग किया जाता है। इससे कई क्षेत्रों में जलस्तर गिरने की स्थिति सामने आई है।
आधिकारिक जानकारी
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, गैर कृषिकारी प्रयोजनों के लिए भूजल निकालने पर अब जल मूल्य-प्रभार देना होगा। यह दरें क्षेत्र की श्रेणी—सुरक्षित, अर्द्धगंभीर, गंभीर और अति दोहित—के आधार पर तय की गई हैं। इसके साथ ही भूजल उपयोग के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, जिसके लिए पांच हजार रुपये की पंजीकरण राशि निर्धारित की गई है।
कहां-कहां होगा प्रभाव
नई व्यवस्था का असर होटल, वॉटर एम्यूजमेंट पार्क, वाहन धुलाई केंद्र, स्विमिंग पूल, औद्योगिक इकाइयों के अलावा व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, रेजीडेंशियल अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी पर पड़ेगा, जहां भूजल का उपयोग किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि शुल्क व्यवस्था से अनावश्यक दोहन पर नियंत्रण होगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि भूजल पर शुल्क लगाने से इसके संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। वहीं कुछ व्यवसायिक संस्थानों का कहना है कि उन्हें अब जल उपयोग की बेहतर योजना बनानी होगी ताकि अतिरिक्त लागत से बचा जा सके।
आगे क्या होगा
सरकार के अनुसार, नई दरें लागू होने के बाद भूजल उपयोग की निगरानी की जाएगी। पंजीकरण और शुल्क भुगतान की प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भूजल का उपयोग संतुलित और जिम्मेदारी के साथ हो।







