
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने औद्योगिक भूमि आवंटन को लेकर सख्त शर्तें लागू की हैं। अब उद्योग लगाने के लिए आवंटित भूमि का तीन वर्ष की अवधि में उपयोग नहीं किया गया तो उसका आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा। हालांकि, औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से राजस्व विभाग की सहमति मिलने पर पट्टेदार को समान प्रयोजन के लिए भूमि को उप पट्टे पर देने का अधिकार होगा। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से भूमि का वास्तविक औद्योगिक उपयोग सुनिश्चित होगा और निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रदेश में औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए पूर्व में कई औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भूमि आवंटन किया गया था। लेकिन कुछ मामलों में भूमि लंबे समय तक उपयोग में नहीं लाई गई, जिससे औद्योगिक विकास प्रभावित हुआ। इसी को देखते हुए सरकार ने नीति में संशोधन किया है।
आधिकारिक जानकारी
ऊधमसिंह नगर जिले के प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए सिडकुल को हस्तांतरित की गई है। पहले जारी आदेशों के अनुसार, आवंटित भूमि को किसी व्यक्ति, संस्थान या संगठन को बेचने अथवा पट्टे पर देने के अलावा किसी अन्य रूप में हस्तांतरित करने की अनुमति नहीं थी। अब सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से राजस्व विभाग की सहमति मिलने पर समान प्रयोजन के लिए उप पट्टा किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था के प्रमुख बिंदु
सरकार के अनुसार, भूमि का उपयोग आवंटन की तिथि से तीन वर्ष के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि इस अवधि में उद्योग स्थापित नहीं किया गया तो आवंटन स्वतः निरस्त माना जाएगा। उप पट्टा केवल उसी उद्देश्य के लिए दिया जा सकेगा, जिसके लिए मूल रूप से भूमि आवंटित की गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि उप पट्टा की अनुमति से निवेशकों को लचीलापन मिलेगा, लेकिन तीन वर्ष की समयसीमा से यह भी सुनिश्चित होगा कि भूमि का दुरुपयोग न हो और औद्योगिक गतिविधियां समय पर शुरू हों।
आगे क्या होगा
सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था लागू होने के बाद औद्योगिक भूमि के उपयोग की नियमित समीक्षा की जाएगी। जिन परियोजनाओं में प्रगति नहीं दिखेगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि औद्योगिक विकास की गति बनी रहे।




