
देहरादून: राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी हिस्से में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए वन विभाग एक बार फिर सक्रिय हो गया है। इस दिशा में कार्बेट टाइगर रिजर्व से पांच और बाघों को राजाजी लाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजा जाएगा। अनुमति मिलने के बाद कार्बेट से बाघों का चयन किया जाएगा। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि जहां राजाजी के पूर्वी हिस्से में बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ा है, वहीं पश्चिमी हिस्से में संख्या बेहद सीमित बनी हुई है, जबकि वहां पर्यावास अनुकूल माना जाता है।
मामले की अहमियत
राजाजी टाइगर रिजर्व राज्य के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल है। पश्चिमी हिस्से में बाघों की संख्या बढ़ने से वन्यजीव संतुलन, जैव विविधता और पर्यटन तीनों को मजबूती मिलेगी। साथ ही यह मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी नियंत्रित करने में मददगार माना जा रहा है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
राजाजी के पूर्वी हिस्से की चीला और रवासन रेंजों में बाघों की संख्या लगातार बढ़ी है। पिछली गणना में यहां 55 बाघ आंके गए थे। इसके उलट पश्चिमी हिस्से में बाघों की मौजूदगी नाममात्र की रही है। इसका प्रमुख कारण राजाजी के बीच से गुजरने वाली रेलवे लाइन, राष्ट्रीय राजमार्ग और चीला नहर को माना जाता है, जिनकी वजह से पूर्वी हिस्से से बाघ पश्चिमी हिस्से में नहीं पहुंच पाते।
आधिकारिक जानकारी
वन विभाग के अनुसार, पश्चिमी राजाजी के मोतीचूर और धौलखंड रेंज में पहले भी बाघिनों की मौजूदगी रही है। इसे देखते हुए वर्ष 2015 में कार्बेट से बाघ लाने की योजना बनाई गई थी, जिसे 2016 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की मंजूरी मिली। इसके बाद 2020 से 2025 के बीच चरणबद्ध तरीके से तीन मादा और दो नर बाघ यहां लाए गए।
प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक रंजन कुमार मिश्र ने बताया कि अब फिर से पश्चिमी हिस्से में पांच और बाघ लाने की योजना पर काम किया जा रहा है। अनुमति मिलने के बाद पुनर्स्थापन से जुड़ा पूरा प्रोटोकॉल तय किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पश्चिमी राजाजी में बाघों की संख्या बढ़ने से क्षेत्र की पहचान मजबूत होगी, लेकिन इसके साथ सुरक्षा और निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।
विशेषज्ञ की राय
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच प्राकृतिक आवागमन बाधित होने से कृत्रिम पुनर्स्थापन ही फिलहाल एकमात्र व्यावहारिक विकल्प है। सही निगरानी और अनुकूल पर्यावास मिलने पर बाघों की संख्या में स्थायी वृद्धि संभव है।
आंकड़े और तथ्य
पश्चिमी राजाजी में पहले लाए गए पांच बाघों में से एक ने देहरादून वन प्रभाग में अपना इलाका बना लिया, जिससे वहां फिलहाल चार बाघ माने जा रहे हैं। इनमें से दो की नियमित गतिविधियां रिकॉर्ड हो रही हैं, जबकि दो की लंबे समय से लोकेशन नहीं मिली है। कार्बेट से लाई गई एक बाघिन ने जून 2023 में चार शावकों को जन्म दिया था, जिनमें से दो को गुलदार ने मार डाला, जबकि दो का अब तक पता नहीं चल सका है।
आगे क्या होगा
वन विभाग जल्द ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजेगा। अनुमति मिलने के बाद कार्बेट से बाघों के चयन, स्थानांतरण और निगरानी की प्रक्रिया शुरू होगी। उद्देश्य यही है कि पश्चिमी राजाजी में बाघों का स्थायी कुनबा विकसित किया जा सके।







