
ऋषिकेश स्थित चन्द्रेश्वर नाले से बिना उपचारित गंदे पानी और ठोस कचरे के गंगा नदी में प्रवाहित होने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने बुधवार को क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप किसी भी स्थिति में गंगा में दूषित जल प्रवाहित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को नाले के उपचार, सफाई और शोधन को लेकर विस्तृत रिपोर्ट व ठोस कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। यह कार्रवाई गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बीते कुछ समय से चन्द्रेश्वर नगर क्षेत्र में यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि नाले के माध्यम से गंदा पानी और कचरा सीधे गंगा नदी में जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इसकी लगातार शिकायतें मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन किया।
गंगा नदी करोड़ों लोगों की आस्था और जीवनरेखा से जुड़ी हुई है। बिना उपचारित सीवेज और गंदा पानी गंगा में जाना न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा है। डीएम का यह सख्त रुख भविष्य में ऐसे प्रदूषण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पहले की घटनाओं का उल्लेख
पूर्व में भी गंगा में गिरने वाले नालों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई होती रही है, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों पर सीवेज और ग्रे-वॉटर सीधे नदी में प्रवाहित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस निरीक्षण के बाद प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आधिकारिक जानकारी
निरीक्षण के दौरान डीएम ने नाले में सीधे दूषित जल प्रवाहित कर रहे 25 घरों के पाइप-ड्रेन्स को तत्काल सीज करने के निर्देश नगर आयुक्त और जल संस्थान को दिए। गली-मोहल्लों में पैदल भ्रमण कर नालियों और सीवरेज व्यवस्था का जायजा लिया गया तथा तीन दिवस के भीतर नालियों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने के आदेश दिए गए।
डीएम ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने और इंटरसेप्शन व ड्रेनेज प्लान के तहत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि नगर निगम, पेयजल निगम, जल संस्थान, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सीवरेज अनुरक्षण इकाई संयुक्त रिपोर्ट तैयार करें, जिसे सार्वजनिक किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से नाले के कारण गंगा प्रदूषित हो रही थी। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन की इस सख्ती का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि अब गंगा में गंदा पानी बहना पूरी तरह बंद होगा।
आंकड़े / डेटा
अधिकारियों के अनुसार ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता का बहुमंजिला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के अंतर्गत ढालवाला-मुनिकीरेती क्षेत्र में स्थापित है, जो अक्टूबर 2020 से संचालित है। वर्तमान में यह श्मशान घाट नाला, चन्द्रेश्वर नगर नाला सहित तीन नालों का शोधन कर रहा है। ड्रोन सर्वे और घर-घर सर्वेक्षण में प्रारंभिक तौर पर 502 परिवार चिन्हित किए गए हैं।
आगे क्या होगा
प्रशासन की ओर से संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर सीवरेज नेटवर्क का विस्तार, एसटीपी क्षमता वृद्धि और अवैध ड्रेनेज कनेक्शनों पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाने की तैयारी है।







