
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वियोम शर्मा की गिरफ्तारी पर रोक और दर्ज मुकदमे को निरस्त करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद अवकाशकालीन न्यायाधीश सुभाष उपाध्याय की पीठ ने याचिकाकर्ता को पुलिस जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए। साथ ही अदालत ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश में सुप्रीम कोर्ट के अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले का हवाला देते हुए बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए गिरफ्तारी नहीं करने के निर्देश दिए और याचिका का अंतिम रूप से निस्तारण कर दिया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून निवासी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वियोम शर्मा ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक और दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामला सोशल मीडिया के माध्यम से कथित धमकी और धन की मांग से जुड़ा बताया गया है, जिस पर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
आधिकारिक जानकारी
याचिका में आरोप है कि वियोम शर्मा द्वारा विपक्षी को डराकर 25 लाख रुपये की अवैध मांग की जा रही थी। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि विपक्षी ने उनसे सोशल मीडिया के जरिए 25 से 30 करोड़ रुपये की संपत्ति बिकवाने को कहा था, जो उनके माध्यम से बिक चुकी है।
याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि संपत्ति बिकने के बाद उन्हें इनाम देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में उनके खिलाफ डालनवाला थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने विपक्षी के प्रार्थनापत्र पर तो मुकदमा दर्ज किया, लेकिन उनके प्रार्थनापत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत का यह आदेश गिरफ्तारी से पहले कानूनी प्रक्रिया के पालन पर जोर देता है।
सोशल मीडिया से जुड़े लोगों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
कानूनी पक्ष
सुनवाई के दौरान विपक्ष की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता सोशल मीडिया के माध्यम से डराने-धमकाने और पैसों की मांग कर रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए और अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार बिना वैधानिक प्रक्रिया गिरफ्तारी नहीं करने का आदेश दिया।
आगे क्या होगा
अब मामले की जांच पुलिस द्वारा जारी रहेगी। याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करना होगा, जबकि पुलिस को अदालत के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।





