
देहरादून: उत्तराखंड में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात एक बार फिर सियासी बहस का विषय बन गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने राज्य में फलों के समर्थन मूल्य को लेकर धामी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा माल्टा ₹10 प्रति किलो और नींबू ₹7 प्रति किलो की दर से खरीद किसानों की लागत भी पूरी नहीं कर पा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हरीश रावत लंबे समय से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों जैसे काफल, माल्टा, नींबू और गलगल को बढ़ावा देने की पैरवी करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय उत्पादों की ‘पार्टी’ आयोजित कर इन फलों को चर्चा में लाते रहे हैं, जिनमें कांग्रेस के साथ-साथ अन्य दलों के नेता भी शामिल होते रहे हैं।
सरकार पर तंज
हरीश रावत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बाहरी कंपनियां माल्टा, नारंगी, नींबू और गलगल के छिलकों को खरीदने उत्तराखंड पहुंच रही हैं, क्योंकि इनका उपयोग दवाइयों और औषधीय उत्पादों में किया जाता है। इसके बावजूद सरकार की जिद है कि माल्टा ₹10 प्रति किलो और नींबू ₹7 प्रति किलो ही खरीदा जाएगा।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार की इस प्रतिज्ञा को कांग्रेस को ही तोड़ना पड़ेगा।
किसानों की चिंता
हरीश रावत का कहना है कि मौजूदा समर्थन मूल्य से किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि स्थानीय उत्पादों को उचित मूल्य नहीं मिला, तो पहाड़ी क्षेत्रों की आर्थिकी कमजोर होगी और इसका असर सामाजिक व्यवस्था पर भी पड़ेगा।
माल्टा पार्टी और स्थानीय पहल
पूर्व मुख्यमंत्री ने 7 दिसंबर 2025 को हरिद्वार बाईपास रोड स्थित एक विवाह स्थल में गैरसैंण माल्टा प्रतियोगिता और माल्टा पार्टी का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए थे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि दूरस्थ क्षेत्रों के उत्पादों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है, ताकि वहां के लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय किसानों और बागवानों का कहना है कि यदि फलों का उचित मूल्य नहीं मिला तो खेती छोड़ने की नौबत आ सकती है। उनका मानना है कि सरकार को समर्थन मूल्य पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों की आजीविका सुरक्षित रह सके।
आगे क्या
राज्य सरकार की ओर से फिलहाल फलों के समर्थन मूल्य में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।






