
ऋषिकेश में ऑटो-विक्रम चालकों की रैली के चलते आईएसबीटी परिसर में जाम जैसे हालात बन गए, जिससे रोडवेज बसों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। बसों की निर्धारित जगहों पर ऑटो-विक्रम पार्क हो जाने के कारण देहरादून और हरिद्वार से आने-जाने वाली रोडवेज बसें बस अड्डे के भीतर प्रवेश नहीं कर सकीं। नतीजतन यात्रियों को मजबूरी में निजी बसों का सहारा लेना पड़ा। इस अव्यवस्था के चलते रोडवेज को करीब दो से तीन लाख रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
शहर में 27 नई ई-बसों के संचालन के विरोध में ऑटो-विक्रम चालकों द्वारा रैली निकाली गई थी। रैली के दौरान नगर निगम कार्यालय और आईएसबीटी क्षेत्र में भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा। आईएसबीटी जैसे प्रमुख परिवहन केंद्र पर अव्यवस्था से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
आधिकारिक जानकारी
दोपहर करीब एक बजे सैकड़ों की संख्या में ऑटो-विक्रम चालक आईएसबीटी परिसर स्थित नगर निगम कार्यालय के बाहर एकत्रित हो गए। कई ऑटो-विक्रम सड़क और बसों के निर्धारित पार्किंग स्थलों पर खड़े कर दिए गए, जिससे आईएसबीटी के बाहर जाम जैसी स्थिति बन गई। बाद में ऑटो-विक्रम पदाधिकारियों की मांग पर पुलिस ने आईएसबीटी में खड़ी रोडवेज बसों को बाहर निकलवाया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
यात्रियों का कहना है कि आईएसबीटी के अंदर बसें न मिलने के कारण उन्हें सड़क किनारे खड़ी निजी बसों से यात्रा करनी पड़ी। कई यात्रियों को यह भी पता नहीं चल पाया कि रोडवेज बसें कहां से चल रही हैं, जिससे भ्रम और असुविधा की स्थिति बनी रही।
आंकड़े / तथ्य
इस दौरान देहरादून और हरिद्वार जाने वाली रोडवेज बसों को सड़क पर ही सवारियां बैठानी पड़ीं। यूपी, पंजाब और चंडीगढ़ से आने वाली रोडवेज बसें भी आईएसबीटी के बाहर सड़क पर खड़ी रहीं। कई बसें यात्रियों के अभाव में खाली लौट गईं। रोडवेज के अनुसार करीब तीन घंटे तक आईएसबीटी परिसर में यात्री न के बराबर रहे, जिससे दो से तीन लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है।
आगे क्या होगा
स्थिति सामान्य होने के बाद रोडवेज ने अपनी नियमित बस सेवाएं बहाल कर दी हैं। प्रशासन और परिवहन विभाग के स्तर पर भविष्य में इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए समन्वय और वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किए जाने की संभावना जताई जा रही है।







