
रुड़की: हरिद्वार जिले के मंगलौर क्षेत्र में नारसन बॉर्डर पर पुलिस ने महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज के काफिले को रोक दिया। जानकारी के अनुसार यति नरसिंहानंद अपने समर्थकों के साथ हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर यूजीसी कानून के विरोध में प्रस्तावित एक दिवसीय सांकेतिक उपवास कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था। सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका के चलते पुलिस ने उन्हें देवभूमि में प्रवेश की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद काफिले को वापस लौटाया गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हरिद्वार एक संवेदनशील धार्मिक नगरी है, जहां किसी भी बड़े धार्मिक या राजनीतिक कार्यक्रम से पहले प्रशासन विशेष सतर्कता बरतता है। यूजीसी कानून के विरोध में प्रस्तावित उपवास कार्यक्रम को लेकर पहले से ही पुलिस प्रशासन को भीड़ और संभावित तनाव की आशंका थी। इसी कारण मंगलौर-नारसन बॉर्डर को संवेदनशील मानते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।
आधिकारिक जानकारी
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह एहतियातन की गई है। एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने बताया कि यति नरसिंहानंद गिरी महाराज के काफिले को बॉर्डर पर रोका गया था और समझाने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था किसी भी सूरत में बिगड़ने नहीं दी जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
काफिले को रोके जाने के बाद बॉर्डर क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल रहा। यति नरसिंहानंद गिरी महाराज ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यूजीसी कानून के विरोध में शांतिपूर्ण सांकेतिक उपवास करना उनका संवैधानिक अधिकार है। वहीं, उनके समर्थकों में भी पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी देखी गई।
आंकड़े / तथ्य
प्रशासन के अनुसार, प्रस्तावित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने की संभावना थी। इसी को देखते हुए मंगलौर-नारसन बॉर्डर पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। हालांकि, किसी भी प्रकार की झड़प या हिंसा की सूचना नहीं मिली है।
आगे क्या होगा
फिलहाल हरिद्वार में प्रस्तावित उपवास कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि बिना अनुमति किसी भी तरह का प्रदर्शन या कार्यक्रम आयोजित नहीं करने दिया जाएगा। वहीं, इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज होने की संभावना जताई जा रही है।







