
रामनगर क्षेत्र के अंतर्गत कालाढूंगी में उस समय हड़कंप मच गया, जब चकलुवा वैली ब्रिज पर भीषण जाम के कारण एक 108 एंबुलेंस लंबे समय तक फंसी रही। एंबुलेंस में मौजूद मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही थी और उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाना जरूरी था। लेकिन अचानक लगे जाम ने एंबुलेंस की रफ्तार थाम दी, जिससे मरीज की जान पर खतरा मंडराने लगा। हालात इतने बिगड़ गए कि काफी देर तक एंबुलेंस पुल पर ही खड़ी रही और अंततः स्थानीय लोगों को खुद आगे आकर रास्ता खुलवाना पड़ा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
कालाढूंगी–रामनगर मार्ग पहले से ही यातायात दबाव और जाम के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। चकलुवा वैली ब्रिज पर संकरी सड़क और भारी वाहनों की आवाजाही के चलते अक्सर जाम की स्थिति बनती रहती है। ऐसे मार्ग पर किसी भी आपात स्थिति में एंबुलेंस का फंसना गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जाती है।
जाम लगने की वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चकलुवा वैली ब्रिज के ठीक बीचों-बीच एक कार सवार ने ट्रक की चाबी पुल से नीचे फेंक दी। इसके चलते ट्रक अचानक बीच सड़क पर ही खड़ा हो गया। ट्रक के रुकते ही दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और कुछ ही मिनटों में यातायात पूरी तरह ठप हो गया। इसी जाम में मरीज को ले जा रही जीवनदायिनी 108 एंबुलेंस भी फंस गई।
पुलिस और प्रशासन की गैरमौजूदगी
हैरानी की बात यह रही कि जाम के दौरान मौके पर न तो कोई पुलिसकर्मी तैनात था और न ही किसी प्रशासनिक अधिकारी की तत्काल पहुंच हो सकी। इससे स्थिति और गंभीर होती चली गई। समय पर हस्तक्षेप न होने के कारण एंबुलेंस को रास्ता मिलने में काफी देर लगी।
स्थानीय लोगों की पहल से खुला रास्ता
एंबुलेंस को रास्ता दिलाने के लिए स्थानीय लोग और राहगीर खुद आगे आए। लोगों ने काफी मशक्कत के बाद वाहनों को इधर-उधर कर यातायात को धीरे-धीरे सुचारू किया, तब जाकर एंबुलेंस को आगे बढ़ने का रास्ता मिल सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वे हस्तक्षेप न करते, तो स्थिति और भयावह हो सकती थी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने पुलिस-प्रशासन की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि समय रहते पुलिस मौके पर पहुंच जाती, तो एंबुलेंस को इतनी देर जाम में नहीं फंसना पड़ता। व्यापारियों और राहगीरों ने भी सवाल उठाया कि चकलुवा वैली ब्रिज जैसे संवेदनशील स्थान पर स्थायी पुलिस व्यवस्था क्यों नहीं है।
आगे क्या होगा
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि चकलुवा वैली ब्रिज और कालाढूंगी क्षेत्र में स्थायी ट्रैफिक व्यवस्था और पुलिस तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज या आम नागरिक की जान खतरे में न पड़े। फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।




