
उत्तरकाशी: सीमांत उत्तरकाशी जिले में गंगा घाटी से लेकर यमुना घाटी क्षेत्र तक जंगलों में लगी आग लगातार विकराल रूप लेती जा रही है। कई वन क्षेत्रों में आग बेकाबू हो चुकी है, जिससे पर्यावरण, बहुमूल्य वन संपदा और वन्यजीवों के जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित जंगलों में आग की लपटें साफ नजर आ रही हैं, जबकि चारों ओर फैले धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया, तो इसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तरकाशी जिले के जंगल हर साल गर्मी के मौसम में वनाग्नि की चपेट में आते हैं, लेकिन इस बार आग की तीव्रता और फैलाव ने चिंता बढ़ा दी है। गंगा घाटी और यमुना घाटी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आग लगने से न केवल जैव विविधता को नुकसान हो रहा है, बल्कि जल स्रोतों और पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। लंबे समय से बारिश और बर्फबारी नहीं होने के कारण जंगलों में सूखापन बढ़ गया है, जिससे आग तेजी से फैल रही है।
धधकते जंगल और धुएं से बिगड़ते हालात
धरासू बैंड के सामने और यमुनोत्री हाईवे पर फेडी के पास स्थित जंगलों में आग लगातार धधक रही है। आग से उठता घना धुआं पूरे क्षेत्र में फैल गया है, जिससे दृश्यता प्रभावित हो रही है। धुआं आसपास के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने से स्थानीय लोगों को आंखों में जलन और सांस संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रात के समय आग की लपटें और भी भयावह नजर आ रही हैं।
वन संपदा और वन्यजीवों पर संकट
जंगल की आग की चपेट में आकर बहुमूल्य पेड़-पौधे और अन्य वन संपदा जलकर नष्ट हो रही है। आग के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हुआ है, जिससे कई जंगली जानवरों को सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे आबादी वाले क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में लगी आग और धुएं से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि दिन में भी आसमान धुंधला नजर आ रहा है और बच्चों व बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।
समाजसेवी सुनील थपलियाल ने कहा कि गंगा और यमुना घाटी के अधिकांश वन क्षेत्रों में आग की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे वन्यजीवों और बेशकीमती वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है।
आधिकारिक जानकारी
वन विभाग के अनुसार जंगलों में लगी आग को बुझाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। प्रभागीय वनाधिकारी डीपी बलूनी ने बताया कि वनकर्मी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं और जल्द ही आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन के सामने आग के तेजी से फैलने के कारण बड़ी चुनौती बनी हुई है।
हाल की अन्य घटनाओं से बढ़ी चिंता
हाल ही में चमोली जिले के नंदा देवी नेशनल पार्क क्षेत्र में भी भीषण वनाग्नि की घटना सामने आई थी, जिस पर कई दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद नियंत्रण पाया जा सका था। उस घटना ने भी यह स्पष्ट कर दिया था कि पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ती वनाग्नि भविष्य के लिए गंभीर संकेत दे रही है।
आगे क्या होगा
प्रशासन और वन विभाग के लिए आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि मौसम में बदलाव नहीं हुआ और समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो उत्तरकाशी सहित आसपास के जिलों में वनाग्नि की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। वन विभाग की रणनीति और संसाधनों की परीक्षा आने वाले समय में होगी।





