
देहरादून जनपद की त्यूणी तहसील से सामने आए एक दर्दनाक मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। भूठ गांव में निर्माण कार्य के लिए गए तीन मजदूरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उनकी पत्नियां न्याय की गुहार लगा रही हैं। 21 वर्षीय कुसुम, 28 वर्षीय दिव्याक्षी और 23 वर्षीय दीपिका ने अपने पतियों की मौत को हादसा मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है। गोद में छोटे बच्चों और आंखों में अनिश्चित भविष्य लिए ये महिलाएं अब प्रशासन और सिस्टम से इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठी हैं। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि मौत की वजह को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जिनके जवाब अभी तक सामने नहीं आए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून जनपद की त्यूणी तहसील के भूठ गांव में 6 जनवरी को भवन निर्माण के लिए गए तीन श्रमिकों की मौत हो गई थी। मृतकों में 35 वर्षीय प्रकाश और 25 वर्षीय संजय, जो सगे भाई थे और डिरनाड गांव के निवासी थे, जबकि तीसरा मृतक 25 वर्षीय संदीप पटियूड गांव का रहने वाला था। तीनों मजदूरी कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे थे, लेकिन एक ही घटना ने तीन परिवारों को उजाड़ दिया।
आधिकारिक जानकारी
प्रशासन की ओर से शुरुआती तौर पर मौत की वजह एलपीजी गैस रिसाव बताई जा रही है। हालांकि, मृतकों के परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक किसी ठोस जांच रिपोर्ट या स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। अधिकारी इस मामले में आगे की जांच की बात कह रहे हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह से तीनों मजदूरों को गांव से दूर एक पुराने स्कूल के कमरे में ठहराया गया था, वह व्यवस्था पहले से ही सवालों के घेरे में थी। ग्रामीणों के मुताबिक, घटना के बाद भी पीड़ित परिवारों को समय पर प्रशासनिक सहयोग नहीं मिल पाया।
मृतकों की पत्नियों की आपबीती
मंगलवार को मृतकों की पत्नियां अपने रिश्तेदारों के साथ देहरादून पहुंचीं। उन्होंने पहले गढ़वाल परिक्षेत्र के महानिरीक्षक से मुलाकात की और फिर उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों के सामने अपनी बात रखी। महिलाओं का कहना है कि जब उन्होंने शव देखे, तो शरीर पर चोट के साफ निशान थे। उनके अनुसार यह महज हादसा नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सच्चाई को दबाने की कोशिश की जा रही है।
ग्राम प्रधान पर संदेह
मृतक मजदूर भूठ गांव के ग्राम प्रधान अमित राणा के घर चल रहे निर्माण कार्य में लगे हुए थे। महिलाओं ने ग्राम प्रधान की भूमिका पर संदेह जताते हुए कहा कि घटना के बाद से न तो तहसील स्तर पर और न ही राजस्व पुलिस की ओर से उन्हें संतोषजनक सहयोग मिला। पुलिस को मामला ट्रांसफर होने के बाद भी उन्हें न्याय की उम्मीद कम नजर आ रही है।
सामाजिक और मानवीय पहलू
तीनों मृतक अनुसूचित जाति समुदाय से थे। उनके जाने के बाद तीन घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। तीन महिलाएं विधवा हो चुकी हैं और छोटे-छोटे बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। महिलाओं का कहना है कि वे सिर्फ इंसाफ चाहती हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिले।
आगे क्या होगा
परिजनों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए और मौत की असली वजह सामने लाई जाए। प्रशासनिक स्तर पर जांच आगे बढ़ाने की बात कही जा रही है, लेकिन पीड़ित परिवार अब ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।






