
हल्द्वानी में चर्चित यूट्यूबर ज्योति अधिकारी को भले ही अदालत से जमानत मिल गई हो, लेकिन उनकी कानूनी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। हल्द्वानी कोर्ट से जमानत आदेश जारी होते ही खटीमा पुलिस ने उप कारागार हल्द्वानी में वारंट बी दाखिल कर दिया, जिसके चलते ज्योति अधिकारी को जेल से रिहा नहीं किया गया। अब खटीमा पुलिस उन्हें संबंधित मुकदमे में पेश करने की तैयारी कर रही है। यह मामला सोशल मीडिया, अभिव्यक्ति की सीमाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़ी बहस के कारण प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ज्योति अधिकारी हाल के दिनों में उस समय विवादों में आईं, जब प्रदेश में अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच और कथित वीआईपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा था। इस दौरान उनके कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें खुलेआम दरांती लहराने और उत्तराखंड की महिलाओं व देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे।
आधिकारिक जानकारी
हल्द्वानी सिविल एवं दंड न्यायालय के अपर मुख्य सिविल जज द्वितीय ने 13 जनवरी को मुखानी थाने में दर्ज दो मुकदमों में ज्योति अधिकारी को जमानत दी। वहीं, खटीमा कोतवाली में दर्ज मामले को लेकर खटीमा पुलिस ने जेल में वारंट बी दाखिल किया, जिसके कारण रिहाई नहीं हो सकी। पुलिस के अनुसार, आरोपी को बुधवार को संबंधित न्यायालय में पेश किया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर सार्वजनिक मंच से दिए गए बयानों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। कुछ नागरिकों का मानना है कि कानून को अपना काम करने देना चाहिए, ताकि मामले का निष्पक्ष समाधान निकल सके।
आंकड़े / तथ्य
ज्योति अधिकारी 8 जनवरी से न्यायिक हिरासत में थीं। हल्द्वानी के मुखानी थाने में दर्ज दो मामलों में उन्हें 30 हजार रुपये के निजी मुचलकों पर जमानत मिली है। इसके अलावा खटीमा, रुद्रपुर और अल्मोड़ा में भी उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
आगे क्या होगा
पुलिस के अनुसार, खटीमा कोतवाली में दर्ज मुकदमे के तहत ज्योति अधिकारी को रिमांड पर लेकर न्यायालय में पेश किया जाएगा। अदालत के आदेश के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।







