
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने साक्ष्य मिटाने और आपराधिक धमकी के मामले में सजा काट रहे हरिद्वार निवासी सिरमौर सिंह को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा और न्यायमूर्ति आलोक माहरा की खंडपीठ ने अपील की सुनवाई के दौरान जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि अपील लंबित रहने तक अपीलार्थी को रिहा किया जाए। कोर्ट का यह आदेश ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा के खिलाफ दायर अपील पर अंतिम निर्णय आने तक प्रभावी रहेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह मामला हरिद्वार जिले से जुड़ा है, जहां द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने सितंबर 2023 में सिरमौर सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 201 (धारा 34 सहित) और धारा 506 के तहत दोषी ठहराया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे अधिकतम सात वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसी सजा को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
आधिकारिक जानकारी
सुनवाई के दौरान अपीलार्थी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि अभियोजन पक्ष ने 17 गवाह पेश किए, लेकिन सिरमौर सिंह के खिलाफ कोई ठोस और भरोसेमंद साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि ट्रायल के दौरान आरोपी जमानत पर था और उसने कभी भी जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कानूनी जानकारों का कहना है कि अपील लंबित रहने के दौरान जमानत देना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, खासकर तब जब आरोपी पहले भी जमानत की शर्तों का पालन करता रहा हो। स्थानीय लोगों के अनुसार, हाईकोर्ट का यह आदेश मामले में संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
आंकड़े / तथ्य
सिरमौर सिंह 5 सितंबर 2023 से न्यायिक हिरासत में था। अभियोजन की ओर से कुल 17 गवाह पेश किए गए थे। ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा की अधिकतम अवधि 7 वर्ष थी।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना आदेश दिया है कि सिरमौर सिंह को संबंधित ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार एक व्यक्तिगत बंधपत्र और दो विश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए। अब इस आपराधिक अपील पर आगे की सुनवाई नियत तिथियों पर जारी रहेगी।







