
नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वित्तीय अनियमितता के आरोपों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। एक ओर कोर्ट ने वाणिज्यिक कर विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर मीनाक्षी त्यागी की बर्खास्तगी और उनसे 93 लाख रुपये की वसूली के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, वहीं दूसरी ओर आईआईएम काशीपुर के पूर्व अधिकारी विनय शर्मा की याचिका को खारिज कर दिया। इन आदेशों को प्रशासनिक अनुशासन और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पहला मामला वाणिज्यिक कर विभाग से जुड़ा है, जिसमें असिस्टेंट कमिश्नर मीनाक्षी त्यागी को 3 अक्टूबर 2025 को चार फर्मों का पंजीकरण रोकने में कथित विफलता और उनके रिफंड क्लेम को मंजूरी देने के आरोपों पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके साथ ही उनसे 93 लाख रुपये की वसूली का आदेश भी जारी किया गया था।
दूसरा मामला भारतीय प्रबंधन संस्थान काशीपुर से संबंधित है, जहां संस्थान के पूर्व अधिकारी विनय शर्मा ने अपने विरुद्ध की गई विभागीय जांच और बर्खास्तगी को चुनौती दी थी।
आधिकारिक जानकारी
मीनाक्षी त्यागी के मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार मेहरा की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर बर्खास्तगी के आदेश पर जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही जांच अधिकारी अजय कुमार को भी नोटिस जारी किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च 2026 को होगी।
वहीं, आईआईएम काशीपुर प्रकरण में उसी खंडपीठ ने विनय शर्मा की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि संस्थान के अधिकारियों द्वारा किसी भी न्यायिक आदेश की जानबूझकर अवहेलना नहीं की गई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
वाणिज्यिक कर विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय जांच में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन बेहद जरूरी है। वहीं, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि संस्थानों में गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर सख्ती आवश्यक है।
आंकड़े / तथ्य
मीनाक्षी त्यागी मामले में 93 लाख रुपये की वसूली का आदेश दिया गया था, जिस पर अब अंतरिम रोक लग चुकी है। आईआईएम काशीपुर प्रकरण में अगस्त 2024 में याचिका दायर की गई थी, जबकि इससे पहले जुलाई 2025 में विनय शर्मा की अवमानना याचिकाएं भी खारिज की जा चुकी हैं।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम राहत दिए जाने के बाद अब राज्य सरकार को निर्धारित समयसीमा में जवाब दाखिल करना होगा। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि मीनाक्षी त्यागी की बर्खास्तगी और वसूली का आदेश आगे जारी रहेगा या नहीं। वहीं, आईआईएम काशीपुर मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद संस्थान की कार्रवाई प्रभावी बनी रहेगी।





