
देहरादून: उत्तराखंड के तीनों ऊर्जा निगमों—यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और पिटकुल—द्वारा भेजे गए टैरिफ प्रस्तावों में कुछ कमियां पाए जाने पर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। प्रस्तावों के अनुसार बिजली दरों में कुल मिलाकर करीब 18.50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का संकेत दिया गया है। आयोग ने अध्ययन के बाद बिंदुवार जवाब देने के लिए निगमों को 17 दिसंबर तक का समय दिया है। जवाब मिलने के बाद याचिकाएं दायर होंगी और फरवरी में जनसुनवाई के जरिए हितधारकों की राय लेकर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई दरें तय की जाएंगी, जो 1 अप्रैल से लागू होंगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हर वर्ष नए वित्तीय सत्र से पहले ऊर्जा निगम नियामक आयोग के समक्ष टैरिफ प्रस्ताव रखते हैं। इन प्रस्तावों के आधार पर आयोग उपभोक्ताओं, उद्योगों और अन्य हितधारकों की राय लेकर दरों का निर्धारण करता है। इस बार प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर उपभोक्ताओं में पहले से ही चिंता बनी हुई है।
प्रशासनिक पक्ष
नियामक आयोग के अधिकारियों के अनुसार यूपीसीएल ने 16.23 प्रतिशत, पिटकुल ने लगभग तीन प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है, जबकि यूजेवीएनएल का टैरिफ प्रस्ताव पहली बार माइनस 1.2 प्रतिशत यानी ऋणात्मक है। यूजेवीएनएल और पिटकुल ने 30 नवंबर से पहले अपने प्रस्ताव जमा कर दिए थे, जबकि यूपीसीएल ने करीब 9 दिसंबर को प्रस्ताव दिया। प्रारंभिक जांच में कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण जरूरी पाया गया, जिस पर आयोग ने पत्र जारी कर जवाब मांगा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
उपभोक्ताओं का कहना है कि महंगाई के दौर में बिजली दरों में बड़ी बढ़ोतरी आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ डालेगी। वहीं उद्योग जगत ने भी दरें तय करते समय उत्पादन लागत और प्रतिस्पर्धा पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखने की मांग की है।
आंकड़े / विवरण
प्रस्तावों के मुताबिक कुल मिलाकर 18.50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का संकेत है। यूपीसीएल का प्रस्ताव 16.23 प्रतिशत, पिटकुल का करीब तीन प्रतिशत है, जबकि यूजेवीएनएल का प्रस्ताव ऋणात्मक 1.2 प्रतिशत रहा है। ऋणात्मक टैरिफ का अर्थ यह है कि यूजेवीएनएल को किसी तरह की दरवृद्धि नहीं मिलेगी, जो पहली बार हुआ है।
आगे क्या होगा
ऊर्जा निगमों से जवाब मिलने के बाद आयोग याचिकाएं स्वीकार करेगा। फरवरी में जनसुनवाई आयोजित कर सभी हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां ली जाएंगी। इसके बाद विस्तृत विश्लेषण कर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरें जारी की जाएंगी, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होंगी।






