
पौड़ी/चंपावत: उत्तराखंड में जंगली जानवरों के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पौड़ी जिले के देवराड़ी गांव में गुलदार ने एक महिला पर जानलेवा हमला किया, जबकि चंपावत के बाराकोट क्षेत्र में तेंदुए के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। दोनों घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत बढ़ा दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार और तेंदुए की बढ़ती आवाजाही लंबे समय से ग्रामीणों की चिंता का कारण बनी हुई है। आबादी के समीप वन्यजीवों का पहुंचना और मानव–वन्यजीव संघर्ष बढ़ना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पौड़ी और चंपावत की ताजा घटनाएं इस समस्या की गंभीरता को फिर उजागर करती हैं।
अधिकारिक जानकारी
पौड़ी जिले के चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के देवराड़ी गांव में आज एक महिला पर गुलदार ने हमला कर दिया। हमले के दौरान स्थानीय युवक अंकित कंडारी ने साहस दिखाते हुए अपनी जान जोखिम में डालकर महिला को गुलदार के चंगुल से छुड़ाया। महिला को ग्रामीणों की मदद से प्राथमिक उपचार दिलाने के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी पौड़ी के निर्देश पर एयर एंबुलेंस से एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
गुलदार के बढ़ते हमलों को देखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा उपाय बढ़ाने का निर्णय लिया है। मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) धीरज पांडेय ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में एनाइड, ड्रोन और कैमरा ट्रैप की मदद से लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने महिलाओं और ग्रामीणों से अपील की कि जंगल जाने से पहले अपनी जानकारी वन कर्मियों को अवश्य दें, ताकि एहतियात बरती जा सके। स्थिति गंभीर होने पर स्कूलों के समय में बदलाव और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था भी की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि हाल के दिनों में गुलदार की सक्रियता बढ़ने से लोग सुबह–शाम घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। देवराड़ी गांव के लोगों ने अंकित कंडारी की बहादुरी की सराहना की है, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर महिला की जान बचाई।
चंपावत जिले के बाराकोट क्षेत्र में भी ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। मंगलवार तड़के 45 वर्षीय देव सिंह अधिकारी पर तेंदुए ने हमला किया, जब वह घर के बाहर नित्यकर्म के लिए गए थे। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। क्षेत्र के लोगों ने वन विभाग से तेंदुए को नरभक्षी घोषित कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। एक माह के भीतर यह दूसरी मौत है, जिससे ग्रामीणों में भय और रोष दोनों बढ़ गया है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मानव–वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ने का कारण जंगलों में संसाधनों की कमी और आबादी का वन क्षेत्रों तक फैलाव है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती वन्यजीव गतिविधियों पर तकनीकी निगरानी और समुदाय आधारित सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है।
संख्या और तथ्य
पौड़ी जिले में गुलदार हमले में एक महिला गंभीर घायल हुई है, जिसे एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। चंपावत जिले के बाराकोट क्षेत्र में तेंदुए ने एक 45 वर्षीय पुरुष की जान ले ली। एक माह में यह दूसरी मौत दर्ज की गई है। निगरानी के लिए ड्रोन, कैमरा ट्रैप और स्थानीय स्वयंसेवकों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो रही है।
आगे क्या होगा
वन विभाग जल्द ही प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में संयुक्त टीमें तैनात करेगा। ड्रोन और तकनीकी निगरानी को बढ़ाया जाएगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम चलाकर लोगों को सुरक्षित रहने के लिए दिशा–निर्देश दिए जाएंगे। चंपावत और पौड़ी के प्रभावित क्षेत्रों में वन कर्मियों की तैनाती बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।






