
यमकेश्वर — यमकेश्वर क्षेत्र के मौन वल्ला में प्रतिबंधित गूलर के हरे पेड़ को काटे जाने का मामला सामने आने पर वन विभाग ने एक रिजॉर्ट संचालक के खिलाफ कार्रवाई की है। सूचना मिलने के बाद लालढांग रेंज की टीम मौके पर पहुंची और जांच के उपरांत संबंधित संचालक का वन एवं वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत चालान किया गया। यह मामला पर्यावरण संरक्षण और वन कानूनों के पालन से जुड़ा होने के कारण स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यमकेश्वर क्षेत्र वन संपदा और प्राकृतिक जलस्रोतों के लिए जाना जाता है। यहां रिजॉर्ट और पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने के साथ पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई को लेकर वन विभाग पहले भी सख्त रुख अपनाता रहा है।
आधिकारिक जानकारी
वन क्षेत्राधिकारी अनुराग जोशी ने बताया कि विभाग को सूचना मिली थी कि मौन वल्ला स्थित एक रिजॉर्ट संचालक ने गूलर के हरे पेड़ पर आरी चलाई है। सूचना के आधार पर लालढांग रेंज अधिकारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच की। जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर रिजॉर्ट संचालक के खिलाफ वन एवं वृक्ष संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत चालान कर दिया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित रिजॉर्ट संचालक द्वारा केवल पेड़ काटने तक ही मामला सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पानी की व्यवस्था के लिए गदेरे में दो मोटर लगाई गई हैं और रिजॉर्ट से निकलने वाली गंदगी भी उसी गदेरे में डाली जा रही है, जिससे पर्यावरण और जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं।
अन्य आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, रिजॉर्ट संचालक ने तहसील प्रशासन की अनुमति के बिना गदेरे में 10 मीटर से अधिक ऊंची दीवार का निर्माण किया है। साथ ही रिजॉर्ट निर्माण के दौरान सिंचाई विभाग की नहर को भी क्षतिग्रस्त किया गया है। इन आरोपों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।
आगे क्या?
वन विभाग का कहना है कि मामले की निगरानी जारी है। यदि अन्य आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की संभावना भी जताई जा रही है।






