
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट में विक्रम ऑटो की सीट क्षमता को 7 से घटाकर 6 करने के परिवहन विभाग के आदेश को चुनौती देती विशेष अपील पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए कि वे विक्रम ऑटो की फोटोग्राफी कराकर अदालत में प्रस्तुत करें। साथ ही, खंडपीठ ने ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का आदेश दिया है। यह मामला सड़क सुरक्षा, यात्रियों की क्षमता और नियमों के पालन से जुड़ा होने के कारण व्यापक सार्वजनिक हित से जुड़ा माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
विक्रम जन कल्याण समिति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर परिवहन विभाग के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें विक्रम ऑटो में सात की बजाय छह सवारियां ले जाने का निर्देश दिया गया है। आदेश के अनुसार, चालक की सीट के बगल वाली सीट पर किसी यात्री को बैठाने पर रोक है और उस स्थान को फाइबर या लोहे की रॉड से बंद करने का निर्देश दिया गया है। विभाग का तर्क है कि इससे दुर्घटनाओं पर अंकुश लगेगा।
न्यायालय का पक्ष
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। कोर्ट ने तथ्यों की बेहतर जांच के लिए याचिकाकर्ता से विक्रम ऑटो की फोटोग्राफी प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही, ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने संकेत दिए कि सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
प्रशासनिक / आधिकारिक जानकारी
परिवहन विभाग का कहना है कि वर्ष 2019 में भी अधिक सवारी ढोने पर रोक लगाई गई थी, लेकिन नियमों का पालन नहीं हुआ। विभाग के अनुसार, कई ऑटो चालक छह की जगह आठ-दस सवारियां ले जाते पाए गए, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा। इसी आधार पर सख्ती बरतते हुए जुर्माना और टैक्स से जुड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय चालकों और यात्रियों का कहना है कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन नियमों को लागू करते समय व्यावहारिक पहलुओं पर भी विचार होना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने अधिक सवारी ढोने से होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए सख्ती को आवश्यक बताया।
आंकड़े / विवरण
आदेश के तहत छह से अधिक सवारी ले जाते पाए जाने पर 20,000 रुपये का जुर्माना और टैक्स संबंधी कार्य रोकने का प्रावधान है। चालक की सीट के पास अतिरिक्त सीट को स्थायी रूप से बंद करने के निर्देश भी शामिल हैं।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की है। उस दिन ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी और याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत फोटोग्राफी के आधार पर आगे की दिशा तय की जाएगी।







