
ऋषिकेश: ऋषिकेश स्थित पौराणिक वीरभद्र मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान मिले प्राचीन पत्थरों और स्थापत्य अवशेषों की जांच के लिए शनिवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण कर प्रारंभिक जांच की और मिले अवशेषों को प्राचीन धार्मिक संरचना से जुड़ा बताया।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को मंदिर परिसर में चबूतरा निर्माण के लिए खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान जमीन के भीतर से नक्काशीदार पत्थर और मूर्तियों जैसे प्रतीत होने वाले संरचनात्मक अवशेष मिले थे। इसके बाद एहतियात के तौर पर निर्माण कार्य रोक दिया गया था।
मध्यकालीन मंदिर संरचना से जुड़े हो सकते हैं अवशेष
शनिवार को एएसआई की चार सदस्यीय टीम मंदिर परिसर पहुंची। टीम में शामिल अधीक्षक पुरातत्वविद एमसी जोशी ने बताया कि खुदाई में मिले पत्थर किसी मूर्ति के सीधे अवशेष नहीं हैं, बल्कि यह किसी प्राचीन मंदिर या धार्मिक संरचना से जुड़े स्थापत्य तत्व प्रतीत होते हैं।
उन्होंने बताया कि इन पत्थरों में गुंबदनुमा हिस्से, मंदिर के ढांचे में बने आले और अन्य नक्काशीदार पत्थर शामिल हैं। प्रारंभिक जांच के आधार पर इन्हें मध्यकालीन काल के निर्माण से जुड़ा माना जा रहा है।
अवशेषों को सुरक्षित रखने की दी सलाह
पुरातत्व विभाग ने मंदिर समिति को सलाह दी है कि इन अवशेषों को सुरक्षित रखा जाए और उन्हें प्रदर्शित भी किया जा सकता है। विभाग के अनुसार यदि मंदिर प्रबंधन चाहे तो इन अवशेषों को मंदिर परिसर में ही संरक्षित किया जा सकता है, अन्यथा विभाग इन्हें अपने संरक्षण में लेकर सुरक्षित रखने और प्रदर्शित करने की व्यवस्था कर सकता है।
टीम ने मंदिर प्रबंधन को यह भी सुझाव दिया कि परिसर में किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पहले एएसआई से आवश्यक परामर्श लिया जाए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
दोपहर बाद राज्य पुरातत्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और परिसर का निरीक्षण किया। टीम में शामिल अनिल बिष्ट ने बताया कि मंदिर परिसर के पास ही एएसआई की एक साइट स्थित है और जहां से ये स्थापत्य अवशेष मिले हैं वह स्थान भी उसी क्षेत्र के काफी करीब है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे का निर्णय एएसआई से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।






