
उत्तरकाशी: सीमांत जिला उत्तरकाशी की पुरोला विधानसभा सीट से भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल और उनकी पत्नी के खातों में मनरेगा की धनराशि जमा होने का मामला सामने आया है। विधायक और उनकी पत्नी के खातों में मनरेगा की मजदूरी कैसे पहुंची, इसे लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा तेज हो गई है। विकासखंड कार्यालय का कहना है कि यह भुगतान पुराने जॉब कार्ड के आधार पर हुआ, जबकि विधायक ने इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बताया है। मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने जारी राशि की रिकवरी की बात कही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देशभर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। इसी बीच उत्तरकाशी जिले की पुरोला विधानसभा से जुड़ा यह मामला सामने आने से स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराना है, ऐसे में जनप्रतिनिधियों के खातों में भुगतान दर्ज होना प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
आधिकारिक जानकारी
विकासखंड कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, विधायक दुर्गेश्वर लाल का मनरेगा जॉब कार्ड पहले से बना हुआ था और उसी आधार पर भुगतान दर्शाया गया है। खंड विकास अधिकारी शशि भूषण बिंजोला ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और शनिवार को संबंधित कार्मिकों को तलब कर पूरी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद दोषी पाए जाने पर मनरेगा के तहत जारी धनराशि की पूरी रिकवरी की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भुगतान प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि मनरेगा जैसी योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए।
भुगतान से जुड़े तथ्य
मनरेगा के ऑनलाइन पोर्टल के अनुसार, जून 2022 में विधायक की पत्नी निशा को रेक्चा के आम रास्ते के पीसीसी खड़ंजा निर्माण कार्य में मजदूरी मिलना दर्शाया गया है। अगस्त–सितंबर 2024 और नवंबर 2024 में बाजुडी तोक में पीसीसी कार्य और समलाडी तोक में वृक्षारोपण कार्य के भुगतान का उल्लेख है। वर्तमान वर्ष में स्वयं विधायक दुर्गेश्वर लाल को पिनेक्ची तोक में भूमि विकास कार्य में रोजगार मिलना दर्शाया गया है।
पोर्टल पर विधायक रहते हुए तीन कार्यों में 5,214 रुपये और वर्ष 2021 से 2025 के बीच कुल 11 कार्यों में दोनों पति-पत्नी के खातों में 22,962 रुपये का भुगतान दिखाया गया है।
विधायक का पक्ष
विधायक दुर्गेश्वर लाल ने कहा कि विधायक बनने से पूर्व उनका जॉब कार्ड अवश्य था, लेकिन वर्तमान में मनरेगा के मस्टरोल पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिचौलियों की दुकानें बंद होने के कारण उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।
आगे क्या होगा
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित दस्तावेजों और मस्टरोल की जांच की जाएगी। यदि भुगतान नियमों के विपरीत पाया गया तो पूरी राशि की रिकवरी की जाएगी और जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई होगी।





