
उत्तरकाशी जनपद की यमुना और गंगा घाटी में बीते कुछ दिनों से लगी जंगलों की आग पर वन विभाग ने काफी हद तक काबू पा लिया है, लेकिन आग से उठ रहा धुआं अब भी क्षेत्र के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। जंगलों से निकलने वाला धुएं का गुबार रिहायशी इलाकों तक फैल गया है, जिससे दृश्यता प्रभावित हो रही है और स्थानीय लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
शीतकाल के दौरान बारिश और बर्फबारी न होने के कारण उत्तरकाशी के वन क्षेत्र लगातार आग की चपेट में रहे। सामान्य तौर पर सर्दियों में होने वाली वर्षा से जंगलों में लगी आग स्वतः बुझ जाती है, लेकिन इस बार दिसंबर और जनवरी में अब तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई, जिससे हालात और गंभीर हो गए।
कहां-कहां लगी थी आग
बीते दिनों धरासू, बाड़ाहाट और मुखेम रेंज के जंगलों में आग की घटनाएं सामने आई थीं। इसके अलावा धरासू बैंड के सामने और यमुनोत्री हाईवे पर फेडी के समीप जंगलों में आग लगातार धधकती रही। वन विभाग की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया, लेकिन मंगलवार को भी पूरे क्षेत्र में धुएं की चादर छाई रही।
वन संपदा और वन्यजीवों को नुकसान
लगातार लगी आग के कारण अमूल्य वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ा है। जानकारों के अनुसार, बारिश और बर्फबारी न होने से वन क्षेत्र अत्यधिक सूखे हो गए थे, जिससे आग तेजी से फैली और नुकसान का दायरा बढ़ गया।
आधिकारिक जानकारी
उत्तरकाशी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी डीपी बलूनी ने बताया कि वन कर्मियों द्वारा जंगलों में लगी आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे वनों में आग न लगाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें, क्योंकि आग लगने से वन संपदा और पर्यावरण को भारी नुकसान होता है।
नंदा देवी नेशनल पार्क की घटना का जिक्र
गौरतलब है कि हाल ही में चमोली जिले में स्थित नंदा देवी नेशनल पार्क के अंतर्गत आने वाले जंगलों में भी भीषण आग लग गई थी। उस आग पर काबू पाने में करीब छह दिन का समय लगा था। हालात इतने गंभीर थे कि एयरफोर्स को तैनात करना पड़ा, हालांकि हेलीकॉप्टर का उपयोग नहीं किया गया। इस दौरान साहसी वनकर्मियों ने आग बुझाने में अहम भूमिका निभाई थी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि आग भले ही अब नियंत्रण में हो, लेकिन धुएं के कारण रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष परेशानी हो रही है। लोगों ने प्रशासन से धुएं से राहत दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
आगे क्या होगा
वन विभाग की टीमें अभी भी प्रभावित इलाकों में निगरानी बनाए हुए हैं। विभाग का कहना है कि मौसम में बदलाव और संभावित बारिश से हालात में सुधार आने की उम्मीद है। साथ ही, संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जा रही है ताकि दोबारा आग लगने की घटनाओं को रोका जा सके।




