
देहरादून। उत्तराखंड के युवा अब रोजगार की तलाश में पलायन नहीं कर रहे, बल्कि अपने ही गांवों में नवाचार आधारित उद्यम शुरू कर सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं। राज्य सरकार की देवभूमि उद्यमिता योजना युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा अवसर प्रदान कर रही है।
इस योजना के तहत पहाड़ी जिलों में हजारों युवाओं को प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे वे स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए रोजगार सृजन के नए रास्ते खोल रहे हैं।
युवाओं के नवाचार की मिसालें
नैनीताल जनपद के भीमताल निवासी पंकज पांडे ने मधुमक्खी पालन को “पर्व हनी” नामक ब्रांड में बदलकर पारंपरिक कार्य को नया आयाम दिया। प्रशिक्षण और ₹75,000 की सीड फंडिंग की मदद से उन्होंने एक साल में ₹5 लाख का कारोबार किया और अब 2028 तक ₹25 लाख का लक्ष्य रखा है।
वहीं टिहरी की जैनब सिद्दीकी ने पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखते हुए चीड़ की पत्तियों से कंपोज़िट बोर्ड बनाने का स्टार्टअप शुरू किया। उन्होंने 6.75 लाख की राशि जुटाकर न केवल पर्यावरणीय समाधान प्रस्तुत किया, बल्कि इसे व्यावसायिक अवसर में भी बदला।
शिक्षा संस्थान दे रहे दिशा
उद्यमिता विकास योजना के तहत अब तक राज्य के 124 उच्च शिक्षण संस्थानों में देवभूमि उद्यमिता केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से 14,260 विद्यार्थियों को उद्यमिता के प्रति प्रेरित किया गया है, जबकि 8,901 विद्यार्थियों को स्टार्टअप निर्माण और विस्तार का प्रशिक्षण दिया गया है।
आगे चलकर राज्य के पहाड़ी जिलों में प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान के आसपास स्थित 30 गांवों के युवा इस योजना का लाभ ले सकेंगे।
डा. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा,
“उच्च शिक्षण संस्थानों में स्थापित केंद्र युवाओं को आत्मनिर्भरता की राह दिखा रहे हैं। यह योजना राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन की समस्या के समाधान की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।”




