
देहरादून: उत्तराखंड में इन दिनों जंगली जानवरों के लगातार हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। पौड़ी, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में भालू और गुलदार के हमलों के कई मामले सामने आने के बाद यह मुद्दा आज लोकसभा में भी गूंजा। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने वन्यजीव हमलों को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार से त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप की मांग की।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में जंगल मानव बस्तियों के बेहद नजदीक हैं, जिसके चलते जंगली जानवरों के मानव संपर्क में आने की घटनाएँ बढ़ रही हैं। हाल के वर्षों में भालू और गुलदार के हमलों में निरंतर वृद्धि हुई है। कई ग्रामीणों की जानें गई हैं, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। महिलाओं के जंगल जाने, बच्चों के स्कूल पहुँचने और ग्रामीणों के दैनिक कार्यों में खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
लोकसभा में अपनी बात रखते हुए गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि वन्यजीव हमलों के कारण नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है और ग्रामीण जीवन कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य के कई क्षेत्रों में भालू और गुलदार का आतंक इतना बढ़ चुका है कि लोग घर से बाहर निकलने से डरते हैं। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि इन हमलों पर अंकुश लगाने के लिए ठोस और कारगर रणनीति बनाई जाए।
बलूनी ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने यह मुद्दा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के समक्ष भी रखा था ताकि जल्द समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकें।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पौड़ी, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे हैं कि जंगली जानवर खेतों, बस्तियों और रास्तों के नजदीक तक आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात तो छोड़िए, दिन में भी पहाड़ी रास्तों पर चलना खतरनाक हो गया है। क्षेत्र के प्रधानों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने कई बार वन विभाग से सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग की है।
वन विभाग पर निर्देश
सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड वन विभाग के पीसीसीएफ से आग्रह किया है कि जंगली जानवरों के हमलों की स्थिति की नियमित समीक्षा की जाए और प्रतिदिन की रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी सूरत में ग्रामीणों को असुरक्षित नहीं छोड़ा जा सकता।
उनका कहना है कि वन्यजीव घटनाओं का रिकॉर्ड, उनका विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली सुदृढ़ करने से हादसों को कम किया जा सकेगा।
आगे क्या?
अब सभी की नजर केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों पर है। ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि वन विभाग पेट्रोलिंग बढ़ाएगा, संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी होंगे और खतरे वाले क्षेत्रों में तुरंत सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। सांसद ने आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे पर लगातार फॉलो-अप करेंगे और समाधान तक प्रयास जारी रखेंगे।





