
देहरादून: उत्तराखंड में नए वक्फ संशोधन कानून के तहत राज्य की सभी वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। वक्फ बोर्ड द्वारा प्रदेशभर की संपत्तियों का विवरण जुटाने और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन बड़ी संख्या में वक्फ जमीनों पर अवैध कब्जे होने के कारण यह काम चुनौतीपूर्ण बन गया है। तय समयसीमा के भीतर पंजीकरण पूरा न होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है, जिससे यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर अहम बन गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
नए वक्फ संशोधन कानून के तहत देशभर में वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण एक निश्चित समयसीमा में पूरा किया जाना था। उत्तराखंड में भी दिसंबर तक यह प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर दिक्कतों के कारण लक्ष्य हासिल नहीं हो सका। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद वक्फ ट्रिब्यूनल ने राज्यों को अलग-अलग समयसीमा तय करने के निर्देश दिए।
समयसीमा तय, गढ़वाल और कुमाऊं के लिए अलग तारीख
वक्फ ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने गढ़वाल मंडल के लिए 6 फरवरी और कुमाऊं मंडल के लिए 31 मार्च तक वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की अंतिम तारीख तय की है। बोर्ड का कहना है कि निर्धारित समय में रजिस्ट्रेशन पूरा करना प्राथमिकता है।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स के अनुसार राज्य में करीब 5 हजार वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें मदरसे, दरगाह, कब्रिस्तान और अन्य धार्मिक स्थल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों पर वर्षों से अवैध कब्जे हैं, जिससे उनका पंजीकरण कराना मुश्किल हो रहा है।
अवैध कब्जों से अटका पंजीकरण
वक्फ बोर्ड का आरोप है कि कई स्थानों पर माफिया जानबूझकर वक्फ संपत्तियों को बोर्ड में दर्ज नहीं होने दे रहे हैं, ताकि अवैध कब्जों पर कार्रवाई न हो सके। बोर्ड का कहना है कि यदि तय समयसीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया तो ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
गायब रिकॉर्ड पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। वक्फ बोर्ड के पास कई संपत्तियों के रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं हैं। चेयरमैन शादाब शम्स ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए संभावित घोटाले की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों के दस्तावेज कैसे गायब हुए, इसकी उच्चस्तरीय जांच जरूरी है और इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है।
सरकार के साथ समन्वय
वक्फ बोर्ड के अनुसार इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और संबंधित विभागीय सचिवों से लगातार चर्चा की जा रही है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि वक्फ संपत्तियों को कब्जामुक्त कराया जाए और उनका उपयोग धार्मिक व सामाजिक उद्देश्यों के लिए सुनिश्चित किया जाए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वक्फ संपत्तियों का सही तरीके से पंजीकरण और संरक्षण किया जाए, तो इससे धार्मिक और सामाजिक कार्यों को मजबूती मिलेगी। वहीं कुछ क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे विवादों के कारण लोगों को प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है।
आगे क्या होगा
वक्फ बोर्ड ने साफ किया है कि तय समयसीमा के भीतर पंजीकरण न कराने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कितनी वक्फ संपत्तियां रजिस्टर हो पाती हैं और कितनी जमीनें अवैध कब्जों से मुक्त कराई जा सकेंगी।







