
ऊधमसिंह नगर: उत्तराखंड एसटीएफ ने विदेश में नौकरी का झांसा देकर युवाओं की तस्करी करने और उन्हें म्यांमार में बंधक बनाकर साइबर अपराध कराने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में शामिल एक एजेंट सुनील को गिरफ्तार किया है। सुनील ऊधमसिंह नगर जिले के जसपुर का रहने वाला है। उसके आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
दक्षिण-पूर्व एशिया में पिछले कुछ महीनों से ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें भारतीय युवाओं को एयरपोर्ट से अगवा कर जंगलों और नदियों के रास्ते म्यांमार ले जाकर साइबर अपराधियों के हवाले कर दिया जाता है। वहां उनसे जबरन कॉलिंग, ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड कराए जाते हैं। उत्तराखंड के कई युवा भी इस जाल में फंस चुके हैं, जिन्हें केंद्र सरकार की मदद से हाल ही में रेस्क्यू कराया गया।
गिरफ्तारी और जांच का विवरण
STF के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि राज्य के करीब 21 युवाओं सहित देश के कई राज्यों के नवयुवकों को म्यांमार से रेस्क्यू किया गया था। जांच के दौरान पता चला कि उत्तराखंड में सक्रिय स्थानीय एजेंट इन युवाओं को अच्छी नौकरी और ₹70,000 महीने की सैलरी का झांसा देकर दिल्ली से बैंकॉक भेजते थे।
बैंकॉक पहुंचने के बाद उन्हें अवैध रास्तों से—
- जंगलों,
- नदियों,
- नावों
के जरिये केके पार्क (मायावड्डी), म्यांमार में ले जाकर जबरन बंदी बनाया जाता था।
स्थानीय प्रतिक्रिया
जसपुर क्षेत्र के युवाओं का कहना है कि पिछले कुछ समय में विदेशों में नौकरी के झांसे बढ़े हैं, जिससे कई परिवार आर्थिक और मानसिक तनाव में आ गए हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि युवाओं को रोजगार के नाम पर ठगी करने वाले ऐसे नेटवर्क पर कड़ी कार्यवाही की जरूरत है।
आजम की आपबीती और FIR
जसपुर निवासी मो. आजम ने 12 तारीख को थाने में शिकायत दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि एजेंट सुनील ने नौकरी के नाम पर उसे धोखे से बैंकॉक भेजा और फिर उसे म्यांमार में साइबर अपराधियों के हवाले कर दिया।
आजम ने बताया कि:
- उसे बंधक बनाकर रखा गया
- फोन कॉल कर ठगी कराई जाती थी
- भागने की कोशिश पर मारने की धमकी दी जाती थी
आजम ने किसी तरह अपने पिता को फोन पर स्थिति बताई। पिता द्वारा संपर्क करने पर सुनील ने 4 लाख रुपये की मांग की, ताकि आजम को वापस बुलाया जा सके।
22 अक्टूबर को भागने में सफल आजम बॉर्डर पर तैनात सेना के पास पहुंचा, जिन्होंने भारतीय दूतावास से संपर्क कर उसका और अन्य युवाओं का रेस्क्यू कराया।
अधिकारियों की जानकारी और आगे की कार्रवाई
एसएसपी भुल्लर ने कहा कि सुनील को गिरफ्तार कर लिया गया है और विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों से उसके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस नेटवर्क में उत्तराखंड या देश के अन्य हिस्सों में कितने एजेंट सक्रिय हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया में फैला बड़ा रैकेट
हाल के महीनों में भारत के कई राज्यों से युवाओं को—
- कंबोडिया,
- लाओस,
- म्यांमार
के सिंडिकेट्स द्वारा मानव तस्करी कर साइबर अपराध में लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह रैकेट ग्लोबल लेवल पर फैला हुआ है और ऑनलाइन फ्रॉड की वारदातों में तेजी का बड़ा कारण है।
आगे क्या?
STF ने संकेत दिया है कि जल्द ही अन्य एजेंटों और गिरोह के सदस्यों की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी। पुलिस युवाओं और अभिभावकों को भी सलाह दे रही है कि विदेशों में नौकरी के नाम पर किसी एजेंट पर बिना सत्यापन भरोसा न करें।







