
देहरादून: प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक बार फिर गति आने की उम्मीद जगी है। राज्य सरकार की ओर से स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 200 करोड़ रुपये के कार्पस फंड की व्यवस्था तो की गई, लेकिन पिछले दो वर्षों से स्टार्टअप बूट कैंप के फिनाले आयोजित न होने के कारण इसका अपेक्षित लाभ युवाओं तक नहीं पहुंच पाया। अब उद्योग विभाग स्तर पर लंबित प्रक्रियाओं को पूरा करने के संकेत मिले हैं, जिससे नवाचार आधारित विचारों और युवा उद्यमियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य में कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित होने वाले स्टार्टअप बूट कैंप का उद्देश्य नवाचार को पहचान देना और योग्य युवाओं को प्रारंभिक सहायता उपलब्ध कराना है। हालांकि, पिछले दो वर्षों से फिनाले आयोजित न होने के कारण चयन प्रक्रिया अटकी रही। इसके चलते कई इनोवेशन आधारित स्टार्टअप शुरुआती चरण में ही ठहर गए और संभावनाशील युवा उद्यमी अवसर से वंचित रह गए।
बूट कैंप फिनाले क्यों है अहम
नियमानुसार स्टार्टअप बूट कैंप के फिनाले में चयनित 10 विजेताओं को मुख्यमंत्री की ओर से एक-एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके साथ ही उन्हें राज्य स्टार्टअप पोर्टल पर पंजीकृत कर अपनी कंपनी स्थापित और संचालित करने के लिए सरकार की ओर से 10 लाख रुपये तक का आर्थिक सहयोग मिलता है। फिनाले न होने से यह पूरी प्रक्रिया रुकी रही और राज्य को संभावनाशील उद्यमी नहीं मिल पाए।
आधिकारिक जानकारी
उद्योग विभाग के उपनिदेशक (स्टार्टअप प्रभारी) राजेंद्र कुमार ने बताया कि हाल ही में उन्हें यह दायित्व सौंपा गया है और जल्द ही लंबित स्टार्टअप बूट कैंप के फिनाले आयोजित किए जाएंगे। विभाग के अनुसार इससे रुकी हुई चयन प्रक्रिया पूरी होगी और युवाओं में दोबारा उत्साह व भरोसा पैदा होगा।
आइआइटी–आइआइएम से होती स्पर्धा
स्टार्टअप बूट कैंप में राज्य के महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित संस्थानों और विश्वविद्यालयों के छात्र भाग लेते हैं। इसमें आईआईटी रुड़की, आईआईएम काशीपुर, पॉलिटेक्निक, आईटीआई, ग्राफिक एरा, यूपीईएस, आईएमएस यूनियन, डीआईटी, क्वांटम विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों के हजारों छात्रों के बीच कई दौर की प्रतियोगिता होती है। अंत में 10 सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप को मुख्यमंत्री सम्मानित करते हैं।
राज्य में स्टार्टअप की मौजूदा स्थिति
वर्ष 2018 से 2023 के बीच राज्य में 115 स्टार्टअप सामने आए हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 15 इनक्यूबेटर सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां युवाओं को तकनीकी मार्गदर्शन, मेंटरशिप और निवेश से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर कार्यक्रमों के नियमित आयोजन में आई ढिलाई एक बड़ी चुनौती बनी रही।
उत्तराखंड को मिला ‘स्टार्टअप लीडर’ दर्जा
केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट स्टार्टअप इकोसिस्टम रैंकिंग के पांचवें संस्करण में उत्तराखंड को ‘लीडर’ श्रेणी में स्थान मिला है। राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर उद्योग विभाग को सर्टिफिकेट ऑफ अप्रिसिएशन भी प्रदान किया गया, जो राज्य के प्रयासों को दर्शाता है।
आगे क्या होगा
उद्योग विभाग के अनुसार लंबित फिनाले आयोजित होने के बाद चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी और योग्य युवाओं को वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे न केवल रुके हुए स्टार्टअप आगे बढ़ेंगे, बल्कि राज्य में उद्यमिता को लेकर नया भरोसा भी बनेगा।





