
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने लंबे समय से लंबित पड़े नियमितीकरण के मुद्दे पर बड़ा निर्णय ले लिया है। राज्य ने विनियमितीकरण नियमावली-2013 में संशोधन करते हुए नई संशोधित विनियमितीकरण नियमावली-2025 लागू कर दी है, जिसके तहत 4 दिसंबर 2018 तक कम से कम दस वर्ष की निरंतर सेवा देने वाले कर्मियों को नियमित किए जाने का मार्ग खुल गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य में दैनिक वेतनभोगी, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ कर्मियों की नियमितीकरण मांग कई वर्षों से लंबित थी। वर्ष 2013 में बनी नियमावली के तहत पाँच वर्ष की सेवा को आधार माना गया था, लेकिन इस प्रावधान पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। तब से मामला अटका हुआ था और हजारों कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
आधिकारिक जानकारी
शुक्रवार को कार्मिक सचिव शैलेश बगोली ने संशोधित नियमावली जारी करते हुए बताया कि अब नियमितीकरण के लिए न्यूनतम सेवा अवधि को दस वर्ष कर दिया गया है। यह अवधि 4 दिसंबर 2018 तक निरंतर सेवा के रूप में गिनी जाएगी।
नई नियमावली के अनुसार वही कर्मचारी नियमितीकरण के पात्र होंगे, जिन्होंने दैनिक वेतन, कार्य प्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक या तदर्थ स्वरूप में कम से कम दस वर्ष की निरंतर सेवा उसी पद या समकक्ष पद पर पूरी की हो।
यह संशोधन लागू होने के साथ ही सरकार ने उन सभी कार्मिकों को राहत दी है, जो 2018 के बाद से अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में थे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
दैनिक वेतनभोगी, संविदा और अन्य अस्थायी कर्मचारी इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह कदम लंबे समय से चली आ रही अस्थिरता को समाप्त करेगा और उन्हें नौकरी में सुरक्षा प्रदान करेगा। हालांकि उपनल कर्मियों ने भी सरकार से अपनी स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब अन्य श्रेणियों को लाभ दिया जा रहा है, तो उन्हें भी समान अवसर मिलना चाहिए।
परिवर्तन क्यों ज़रूरी था?
पुरानी नियमावली के तहत पाँच वर्ष की सेवा पर्याप्त मानी जाती थी, लेकिन कोर्ट की रोक के बाद प्रक्रिया बाधित हो गई थी। नई नियमावली में दस वर्ष की सीमा तय करने से सरकार ने स्पष्ट आधार दिया है, जिससे चयन और नियमितीकरण प्रक्रिया कानूनी रूप से भी अधिक मजबूत मानी जाएगी।
आगे क्या?
अब विभिन्न विभाग नियमितीकरण के लिए पात्र कर्मियों की सूची तैयार करेंगे। सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि सभी पात्र कर्मचारियों के कागज़ों की जांच प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। उधर उपनल कर्मियों ने भी सरकार से मिलने की तैयारी शुरू की है ताकि उन्हें भी नई नियमावली में शामिल किए जाने पर विचार किया जा सके।







