
देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2003 की मतदाता सूची के आधार पर प्री-एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के तहत बीएलओ मैपिंग पूरी कर ली गई है। 10 जनवरी तक चली इस प्रक्रिया में प्रदेश के करीब 85 लाख मतदाताओं में से 59 लाख की मैपिंग हो गई, जिनके नाम 2003 में उत्तराखंड की मतदाता सूची में दर्ज थे। ऐसे मतदाताओं को आगामी एसआईआर में किसी भी दस्तावेज़ को जमा करने से छूट दी गई है। हालांकि, वे मतदाता जो 2003 में यूपी या अन्य राज्यों में वोटर थे और अब उत्तराखंड में हैं, उनकी ऐप-आधारित मैपिंग एसआईआर शुरू होने के बाद ही होगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत एसआईआर से पहले प्री-एसआईआर मैपिंग कराई गई, ताकि पुराने रिकॉर्ड वाले मतदाताओं की पहचान स्पष्ट हो सके और अनावश्यक दस्तावेज़ीकरण से बचा जा सके। राज्य में एसआईआर फरवरी में संभावित है, हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
आधिकारिक जानकारी
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार, जिन मतदाताओं का नाम 2003 में उत्तराखंड की सूची में था, उनकी बीएलओ मैपिंग पूरी कर दी गई है और उन्हें एसआईआर में दस्तावेज़ देने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, 2003 में दूसरे राज्यों के वोटरों की ऐप के माध्यम से मैपिंग एसआईआर शुरू होने के बाद ही की जा सकेगी।
किन मतदाताओं को करना होगा इंतजार
प्रदेश में बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है, जो वर्तमान में उत्तराखंड में पंजीकृत हैं लेकिन 2003 में उनका वोट यूपी या अन्य राज्यों में था। प्री-एसआईआर में उनकी जानकारी ली गई है, पर ऐप-आधारित मैपिंग अभी नहीं हुई है। यह प्रक्रिया एसआईआर की अधिसूचना जारी होने के बाद शुरू होगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
मतदाताओं का कहना है कि 2003 सूची वाले वोटरों को दस्तावेज़ से छूट मिलने से प्रक्रिया सरल हुई है। वहीं, अन्य मतदाताओं ने समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद जताई है ताकि अंतिम समय में परेशानी न हो।
पहले से दस्तावेज़ तैयार रखने की सलाह
चुनाव अधिकारियों ने ऐसे मतदाताओं को सलाह दी है जो 2003 में दूसरे राज्यों के वोटर थे कि वे एसआईआर शुरू होने से पहले अपने दस्तावेज़ तैयार रखें। उन्हें 2003 के अपने वोट का विवरण या माता-पिता/दादा-दादी के वोट का प्रमाण देना होगा। यदि यह उपलब्ध न हो, तो आयोग द्वारा अनुमन्य 12 अन्य दस्तावेज़ों में से कोई एक एसआईआर फॉर्म के साथ प्रस्तुत किया जा सकेगा।
आगे क्या होगा
एसआईआर की औपचारिक घोषणा के बाद ऐप-आधारित मैपिंग शुरू होगी और शेष मतदाताओं की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। चुनाव विभाग का लक्ष्य है कि पुनरीक्षण पारदर्शी और सुगम रहे, ताकि किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से वंचित न हो।




