
देहरादून: नई दिल्ली में आयोजित प्री-बजट परामर्श बैठक में उत्तराखंड ने अपनी विकास आवश्यकताओं को प्रमुखता से रखते हुए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। राज्य सरकार ने दूरस्थ और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में जल विद्युत परियोजनाओं को व्यवहारिक बनाने के लिए दो करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की दर से कुल 8000 करोड़ रुपये की वाइब्लिटी गैप फंडिंग का अनुरोध किया। इस बैठक में उत्तराखंड ने खुद को देश के “वाटर टावर” और महत्वपूर्ण इको-सिस्टम सेवाओं के प्रदाता के रूप में प्रस्तुत करते हुए संतुलित और जलवायु अनुकूल विकास की जरूरत को रेखांकित किया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पर्वतीय और सीमावर्ती राज्य होने के कारण उत्तराखंड की विकास आवश्यकताएं अन्य राज्यों से अलग हैं। यहां भौगोलिक कठिनाइयों, आपदाओं की संवेदनशीलता और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विशेष नीतिगत सहयोग की जरूरत पड़ती है। इसी क्रम में प्री-बजट परामर्श बैठक को राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ प्री-बजट बैठक आयोजित की गई। उत्तराखंड की ओर से मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने राज्य के सुझाव रखे। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास, सीमांत इलाकों को सशक्त बनाने और जल विद्युत परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री का पक्ष
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार से उत्तराखंड को लगातार सहयोग मिल रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आगामी केंद्रीय बजट राज्य की विकास यात्रा को और गति देगा तथा जलवायु अनुकूल विकास, सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं और ‘विकसित भारत’ के संकल्प में उत्तराखंड की भूमिका को मजबूत करेगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राज्य से जुड़े नीति विशेषज्ञों का कहना है कि यदि केंद्र सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो इससे पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार, ऊर्जा उत्पादन और बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिलेगी। इससे पलायन जैसी समस्याओं पर भी आंशिक रूप से अंकुश लग सकता है।
उत्तराखंड की प्रमुख मांगें और सुझाव
• राज्यों के लिए पूंजी निवेश को विशेष सहायता योजना को जारी रखा जाए
• फ्लोटिंग पॉपुलेशन को देखते हुए सतत पर्यटन के लिए नई नीति बनाई जाए
• भू-जल स्तर में गिरावट रोकने के लिए नई केंद्र पोषित योजना या अनुदान
• वन्यजीवों से फसल क्षति रोकने के लिए क्लस्टर आधारित तारबंदी को नई योजना में शामिल किया जाए
• स्टेट डेटा सेंटर्स के सुदृढ़ीकरण हेतु केंद्र पोषित योजना
• बागेश्वर–कर्णप्रयाग और रामनगर–कर्णप्रयाग रेललाइन का सर्वेक्षण
• जल जीवन मिशन के अनुरक्षण को केंद्र पोषित योजना में शामिल कर अवधि बढ़ाई जाए
• जल जीवन मिशन (शहरी) के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान
• आपदा से हुई क्षति के पुनर्निर्माण की पूरी राशि एसडीआरएफ से वहन करने का प्रावधान
• वृद्धावस्था पेंशन में केंद्रांश 200 से बढ़ाकर 500 रुपये किया जाए
• आंगनबाड़ी कर्मियों के मासिक मानदेय में वृद्धि
• कुंभ आयोजन को देखते हुए आधारभूत अवसंरचना और अनुरक्षण के लिए विशेष अनुदान
आगे क्या होगा
प्री-बजट परामर्श के बाद इन सुझावों और मांगों पर केंद्रीय स्तर पर मंथन किया जाएगा। आगामी केंद्रीय बजट में इनमें से कितनी मांगों को स्थान मिलता है, इस पर राज्य के विकास की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।







