
देहरादून: उत्तराखंड में वर्षों से लंबित ग्रामीण सड़कों के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के तहत केंद्र सरकार ने राज्य की 184 सड़कों के निर्माण के लिए 1707 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जिस पर अब राज्य सरकार तेजी से काम शुरू करने जा रही है। इन सड़कों की कुल लंबाई करीब 1228 किलोमीटर होगी। यह योजना उन गांवों के लिए खास मानी जा रही है, जहां आज भी सड़क कनेक्टिविटी नहीं है या मौजूदा सड़कें बेहद जर्जर स्थिति में हैं। इससे हजारों ग्रामीण आबादी को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क कनेक्टिविटी विकास की सबसे बड़ी जरूरत मानी जाती है। कई गांव आज भी स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार जैसी बुनियादी सुविधाओं से सिर्फ इसलिए दूर हैं क्योंकि वहां तक पक्की सड़क नहीं पहुंच पाई। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों के जरिए पहले भी हजारों बसावटों को जोड़ा गया है, लेकिन बड़ी संख्या में गांव अब भी इंतजार में थे।
आधिकारिक जानकारी
सचिव ग्रामीण विकास धीराज गर्ब्याल ने बताया कि PMGSY-IV के पहले चरण में स्वीकृत 184 सड़कों पर जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इन सड़कों की कुल लागत करीब 1700 करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि विभाग का लक्ष्य है कि जिन गांवों की आबादी 250 से अधिक है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सड़क से जोड़ा जाए। इसके साथ ही जहां कच्ची या खराब हालत की सड़कें हैं, वहां उनका उच्चीकरण कर बेहतर गुणवत्ता की सड़कें बनाई जाएंगी।
दूसरे चरण की तैयारी
ग्रामीण विकास विभाग ने योजना के दूसरे चरण के लिए भी तैयारी शुरू कर दी है। सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, PMGSY-IV के अगले चरण में 203 सड़कों की डीपीआर तैयार की जा चुकी है। इन सड़कों के निर्माण पर करीब 1033 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि सड़क बन जाने से न सिर्फ सफर आसान होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच भी बेहतर होगी। कई गांवों के निवासियों ने उम्मीद जताई कि अब उन्हें बरसात और आपात स्थिति में अलग-थलग नहीं पड़ना पड़ेगा।
आंकड़े / तथ्य
राज्य में PMGSY के पहले चरण में करीब 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1860 बसावटों को जोड़ने के लिए 19,358 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं। PMGSY-II में 112 योजनाएं स्वीकृत हुईं, जिनमें अधिकांश सड़क उच्चीकरण से जुड़ी थीं। वहीं PMGSY-III में 212 सड़कों का उच्चीकरण किया गया है।
6000 गांव मानकों से बाहर
उत्तराखंड के करीब 6000 गांव ऐसे रहे हैं, जो आबादी 250 से कम होने के कारण PMGSY के मानकों से बाहर हो गए थे। इस कारण बड़ी संख्या में छोटी बसावटें सड़क कनेक्टिविटी से वंचित रह गई थीं।
क्लस्टर योजना से मिलेगा समाधान
इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने क्लस्टर आधारित मॉडल पर काम शुरू किया है। सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, 250 से कम आबादी वाले गांवों को पास की बसावटों के साथ क्लस्टर बनाकर PMGSY के दायरे में लाने की योजना तैयार की जा रही है। इससे छोटी-छोटी बसावटों को भी सड़क सुविधा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार का दावा है कि स्वीकृत सड़कों पर निर्माण कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा और समयबद्ध तरीके से इन्हें पूरा करने का प्रयास होगा। साथ ही, दूसरे चरण की सड़कों के लिए केंद्र से मंजूरी मिलते ही परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।






